Monday, May 22, 2017

ज़िन्दगी के सँग

हवाओं के संग चलूँ मैं
रुख से रुख मिला लूँ मैं
ज़िन्दगी से रँगों से सजे
नए नए रास्तों पर
आसान से सफर में
बस चलता रहूँ मैं
ज़िन्दगी के सँग चलूँ मैं
रुकना मेरी आदत नहीं

थोड़ा सा सहारा भी हो
खुद पर कुछ भरोसा हो
हमसफ़र का साथ हो
हाथ से मिले हाथ हों
बस बेफ़िक्र सा कहीं
उड़ चलने का इरादा हो
क़द्र है आसमाँ की लेकिन
आसमाँ मेरी मंज़िल नहीं
ज़िन्दगी के सँग चलूँ मैं
रुकना मेरी आदत नहीं

मचलते से अरमानों के साथ
खुशनुमा नज़ारों के बीच
गुनगुनाती ख़ुशी के साथ
मौसम बहारों का हो न हो
सर्द मौसम की ख़ामोशी सही
पर ज़रा गर्मजोशी हो
बस सब्र हो जहाँ
चाहूँ मैं ऐसी ज़मीं
ज़िन्दगी के सँग चलूँ मैं
रुकना मेरी आदत नहीं

चाहता मैं नहीं कुछ अलग
हर रास्ता है मेरा अज़ीज़
मन में अपनी ही ललक से
बस खुशियों की ऊंची उड़ान
उड़ना ऊँचे ही उड़ना
ऐसी मेरी फितरत नहीं
आसमाँ की ओर देखूँ लेकिन
पाँव मेरे छूते हों ज़मीं
ज़िन्दगी के सँग चलूँ मैं
रुकना मेरी आदत नहीं
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