Wednesday, May 30, 2012

Apprehensions/अरमाँ

बात कोई खास न थी फिर भी न जाने क्यों अरमाँ मचल मचल गए अँधेरा था छाया मन में उनके ख्याल क्या आए सौ सौ चिराग जल गए Wasn't a great issue Yet don't know why Apprehensions were there Darkness surrounded within Thanks to those thoughts For brightening deep within

Self

दुनियाँ के ख़यालों में उलझा मैं भूल गया था अवश्य ही मेरा मुझसे भी तो कुछ नाता है अब साबित कर दिखलाना होगा मुझ को मुझे ख़ुद से भी तो प्यार निभाना आता है Lost in thought of everyone around I had forgotten my relation with me Now I may have need to vindicate I know how to live up to loving self

बड़ा इम्तहान

आज फिर वो चुप हैं कोई बड़ा पैगाम आने वाला होगा ज़रूर लावा बन रहा होगा अब हमें भी शायद निपटने को ज्वालामुखी से तैयारी में में लगना होगा हवा भी गुम है आज यहाँ कोई पत्ता तक नहीं हिलता कोई तूफ़ान आने वाला होगा सागर तट कितने शांत हैं समंदर की इन शांत लहरों में बड़ा उफ़ान आने वाला होगा एक हम हैं बोले जा रहे थे अपनी कब्र आप खोद बैठे यहीं कब्रिस्तान बनने वाल होगा जान बूझकर कैसे कह बैठे कहाँ बवंडर में फंस गए दिल लहू लुहान होने वाला होगा आज वो फिर चुप हैं बड़ा इम्तहान आने वाला होगा

Tuesday, May 29, 2012

अनिश्चित

दुविधा है मेरी जाऊं मैं किस राह चलूँ लीक पर या चुनूँ नई कोई राह पथ की बाधाएँ तो होंगी दोनों ही और मैं क्यों न करूँ किसी पथ का रुख कुछ तो पा ही लूँगा मैं एक राह क्या ध्वनित क्या चित्रित से लेना मुझको तो बस चुन लेनी कोई राह बढ़ता जाऊं किसी गीत की लय सा साज न हो बस सुर भी होंगे काफी कुछ तो संगीत निक़ल ही आयेगा रहूँ खड़ा मैं सोचता सभी अनिश्चित कैसे हूँगा निश्चित चलना किस राह जहाँ बढ़ चलूँ वहीँ सुलभ है मेरी राह

Monday, May 28, 2012

बेज़ार

इसे न मान भला भी कहाँ हम जायेंगे यही तो है हमारी सब खुशियों का संसार अब जो हो सो ही हम लगायेंगे गले से मिलीं हैं जब खुशियाँ तो होंगे भी बेज़ार Where to go by not liking surroundings This is where my paradise of happiness Come what may I will happily cherish Happiness will also over-weigh the woes

Saturday, May 26, 2012

यूँ ही

बस तेरी चाहतों का सिलसिला यूँ चलता रहे घूम फिर के फिर यूँ ही बात हम पर आती रहे हम तुम्हें हर बात पर हमेशा शाबशियाँ देते रहें तू हमें हर बात पर हर रोज़ यूँ ही आजमाती रहे

Friday, May 25, 2012

फ़साना/Story

कभी तो लिखेगा फ़साना हमारा भी ज़माना अगर हमारे साथ न सही हमारे बाद ही सही कोई इज्ज़त अफज़ाई की हमें उम्मीद नहीं उनकी नज़र से हमारे गुनाहों का जिक्र सही People will sure write our story someday Be it a little later if not in our times We shouldn't look to them for good words Let it be our follies in their perception

फ़ासले /distance

तुम हमसे रहे हमेशा अनजान हम भी रहे सदा तुमसे बेखबर न हम थे सिफ़र न तुम सिफ़र ये तो बस फ़ासलों का है सफ़र You had never known me I remained stranger for you None of us were the duffers It's the journey of distance

Thursday, May 24, 2012

चुनौती /Challenge

हाँ तेरे मगरूर होने पर भी शायद तसल्ली मिल जाती है दिल को मानकर मुक़ाम अच्छा लगता है कुछ तो चुनौती मिली है दिल को Even your arrogance too Assures my heart somehow Knowing that the destination Offers the challenge somehow

Wednesday, May 23, 2012

परहेज़

अब तो तुमने आजमा के भी देख लिया कब तक हक़ीक़त से करते रहोगे ग़ुरेज गिला शिकवा सब करके भी देख लिया कब तक तुम हमसे रख पाओगे परहेज़ Now that you have even tested me How long would you continue ignoring me complaints regrets all you tried out How long would you keep avoiding me

वाष्प

बादल के कोने से टपकती सी बूंद पूछ रही थी मुझसे कुछ और करो अभी तुम इन्तज़ार सूरज की गर्मी ने दिखाया रुतबा अपना बूंद वाष्प बन उड़ गई वो भी देखती रह गई हम भी देखते रह गए

Tuesday, May 22, 2012

दुआएं

क़ामयाबी तो मिल ही जाएगी हमें क़िस्मत से है क्या लेना हमारे लिए तो बस काफ़ी हैं आपका साथ दोस्तों की दुआएं और हमारे हौसले का ज़ज्बा आपके लिए भी तो यही है तमन्ना भी और दुआ हमारी

जिक्र

हम तो अपनी बात नहीं करते ज़माने की बात भी नहीं करते जब हम दिल से कहते हैं बातें जिक्र ख़ुद बस आ ही जाता है हमारा भी और ज़माने का भी जब होगा इन दोनों का जिक्र ज़ाहिर सी बात है ये भी की तुम्हारा भी जिक्र हो जाता है

Sunday, May 20, 2012

पर्वत प्रदेश में पावस ...सुमित्रानंदन पन्त

पर्वत प्रदेश में पावस पावस ऋतु थी,
पर्वत प्रदेश, पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश।
मेखलाकर पर्वत अपार
अपने सहस्‍त्र दृग-सुमन फाड़,
अवलोक रहा है बार-बार
नीचे जल में निज महाकार, -
जिसके चरणों में पला ताल
दर्पण सा फैला है विशाल!
गिरि का गौरव गाकर झर-झर
मद में लनस-नस उत्‍तेजित कर
मोती की लडि़यों सी सुन्‍दर
झरते हैं झाग भरे निर्झर!
गिरिवर के उर से उठ-उठ कर
उच्‍चाकांक्षायों से तरूवर
है झॉंक रहे नीरव नभ पर
अनिमेष, अटल, कुछ चिंता पर।
उड़ गया, अचानक लो, भूधर फड़का
अपार वारिद के पर!
रव-शेष रह गए हैं निर्झर!
है टूट पड़ा भू पर अंबर!
धँस गए धरा में सभय शाल!
उठ रहा धुऑं, जल गया ताल! -
यों जलद-यान में विचर-विचर था
इंद्र खेलता इंद्रजाल ( सुमित्रानंदन पन्त )

Saturday, May 19, 2012

Enjoying being ‘Dead’

My folks at work now started to ignore
Friends have also decided to stay away
Well wishers now keep an arm’s distance
Family treats me kind of wastegeal organ
Unperturbed I refuse being obsolete me
My quiet hours give me the reassurances
I have time for me for what I want to do
New friends are waiting to embrace me
I have so much to look forward to around Wow!
Novel things would be companions
My past associations are good memories
I don’t want them to be anyway disturbed
They may treat me like for them I am dead
I am enjoying more being treated as dead

My Hindi Lyrics

पल पल, लम्हा लम्हा
धीरे धीरे तनहा तनहा
खुशियाँ यूँ, मुस्कुराने लगीं
मेरे पास, अब हैं आने लगीं
पल पल लम्हा लम्हा
गर्मियों की धूप जैसे बादलों में छुपने लगी
गर्म हवा के थपेड़े से अलग
बहार की बयार बन, छाने लगी
पल पल लम्हा लम्हा
मन में हथौड़े सी बरसती आवाजें
बदलने लगीं कोयलों की कूक बन
अब नई धुन कोई, बजने लगी
पल पल लम्हा लम्हा
अब तो दिन और मेरी रातें बदलने लगीं
बिगडती सी लगती मेरी
तक़दीर अब संवरने लगी
पल पल लम्हा लम्हा

दिल का क्या दिल कहीं और हम लगा लेंगे
प्यार तुमसे ही मगर यार हम निभाएंगे
भूलकर अपने दिल की हम हर क़सक
प्यार की एक नई ही दास्ताँ सुनायेंगे
दिल की रवानगी से अलग होकर भी
प्यार के सब हसीन गीत हम सुनायेंगे
प्यार में अपने उनकी ठोकरें खाकर भी
प्यार का हर नया लफ्ज़ हम दोहराएंगे
और के लिए नहीं बस अपनी ही ख़ातिर
ज़िन्दगी के हसीन गीत हम सुनायेंगे
प्यार एक बार है इसे न हम भुलाएँगे
दिल का क्या दिल कहीं और हम लगा लेंगे



जाने कैसे ऐसे तुमसे प्यार हो गया
उम्र भर का नाता तुमसे यार हो गया

तुमने मेरे दिल की बातें सब नामंजूर कर दी
फिर भी मैंने ये ज़िन्दगी तेरे नाम कर दी
तुमको हो न हो मुझे इकरार हो गया
उम्र भर का नाता तुमसे यार हो गया

आते आते शायद मैंने कुछ देर कर दी
फिर भी अपनी हसरतें तेरे नाम कर दीं
ये दिल भी मेरा नाम तेरे प्यार हो गया
उम्र भर का नाता तुमसे यार हो गया

है खिज़ां पर प्यार ये हर बार बढ़ गया
बागवान में फूलों सा हज़ार बार हो गया
ये हर कली हर फूल तेरा यार हो गया
उम्र भर का नाता तुमसे यार हो गया





ये हवाएं ये फ़िज़ायें गुन्गुनाके
कह तो रही हैं कुछ
ये कहानी मेरी उनकी
धीरे धीरे बन रही कुछ कुछ

न जाने मुझे क्या ये होने लगा
हवाओं में मैं हूँ खोने लगा
न जाने कहाँ भटकने लगा
पर है अज़ब एहसास कुछ कुछ
प्यार की हलकी खुमारी
लम्हा लम्हा बढ़ रही है कुछ

किसी की यादों में खोने लगा
हसीं सपनों में विचारने लगा
क्या मैं किसी का होने लगा हूँ
आ रहा अब समझ कुछ कुछ
हौले हौले हलके हलके बह रही है
ये हवा कुछ कुछ
हाँ बताती सारी बातें आवाज़ें सारी
राज़ ये कुछ कुछ

ये हवाएं ये फ़िज़ायें गुन्गुनाके
कह तो रही हैं कुछ
ये कहानी मेरी उनकी धीरे धीरे
बन गई कुछ कुछ



रूहानी है प्यार मेरा
ये जिस्म तो यूँ भी है ही तेरा
कई मुद्दत से कई जन्मों से
प्यार भरा नस नस में तेरा

तू ही गुज़ारिश तू ही सबब है
तू है अरमाँ तू ही रब है
तू ही आसमां तू ही ख़्वाब है
तू ही तो है इकरार मेरा

तेरी ही बातें तेरी ही बाँहें
तू ही रूबरू तेरे ही सपने
तू ही प्यास है तू ही मंजिल
तू ही तो है घर-बार मेरा

तेरे वास्ते मैं दुनियाँ हूँ
मेरे वास्ते तू ही सब कुछ
प्रीत ये मेरी मुझसे कहती
तू ही तो है संसार मेरा



South Asia my region, my heart remain an Indian
I love Nepali, I love Srilankan, I love Madivians
I love Afghani I love bangladeshi, I love bhutani
I love love Pakistani

काबुल हमें क़बूल कोलम्बो हमें अज़ीज़
ढाका की क्या है बात, इस्लामाबाद आबाद
माले और दिल्ली हैं छोटे-बड़े पर अपने
थिम्फू और काठमाण्डू शांति के पूरक नाम
We all share our history so what separate nation
South Asia my region, my heart remain an Indian

अपनी हो साझा सोच, अपना हो एका सब में
अपनी छोटी दुनियाँ में, अपना ही एक जगत हो
अपना न कभी झगड़ा हो, कोई मज़हब के नाम
We prosper together, We share among as one
South Asia my region, my heart remain an Indian

जीने-मरने में सँग हैं, हिल-मिल के हम रहते हैं
सारी दुनियाँ हमें देखे , दें हम बस दोस्ती के पैग़ाम
हम आपस में सीखेंगे, नहीं होंगे कभी बदनाम
We are not parochial, we are global citizen
South Asia my region, my heart remain an Indian

I love Nepali, I love Srilankan, I love Madivians
I love Afghani I love bangladeshi, I love bhutani
I love love Pakistani




इश्क़ के लम्हे, प्यार की बातें
मदहोश कर देती हैं, प्यार की बातें

यूँ ही होता है
प्यार जब होता है
मन नहीं भरता है
हर पल उसी की बातें
प्यार की बातें

दिल कहीं खोता है
एक सुरूर रहता है
हर वक़्त उसी की यादें
प्यार की बातें

समय रुक जाता है
रात में दिन होता है
दिन बनें रातें
प्यार की बातें

इश्क़ ही ख़ुदा होता है
और कुछ नहीं है
बस वही चाहतें
प्यार की बातें

इक़रार हो या इंकार हो
कुछ फरक नहीं है
नहीं कुछ शिकायतें
प्यार की बातें

लव यु डार्लिंग, लव यु स्वीटी, लव यु बेबी
आई लव यु तुझको
जो भी है मन में तेरे, सोच न कुछ भी
बस कह दे मुझ को


समय से हांरा सही, पर दिल से हूँ जीता
लव में मैं पागल, दिल से हूँ घायल
कोई कुछ भी कह दे जो मर्ज़ी कह ले
परवाह न मुझ को

लव यु डार्लिंग, लव यु स्वीटी, लव यु बेबी
आई लव यु तुझको
जो भी है मन में तेरे, सोच न कुछ भी
बस कह दे मुझ को

बातों से कह दे, आँखों से कह दे
अपनी अदाओं से, क्यों मारे मुझ को
दिल ही दिल में सही, हाँ तुझको कबूल है
चाहे तू मुझको

लव यु डार्लिंग, लव यु स्वीटी, लव यु बेबी
आई लव यु तुझको
जो भी है मन में तेरे, सोच न कुछ भी
बस कह दे मुझ को

Friday, May 18, 2012

गुमशुदा

गुमशुदा हैं तराने ख़ुशियों के क़ैद में हैं हसीं लम्हे तुम्हारे ज़ब्तशुदा हैं पल मोहब्बत के ख़ुद तुम्हारी ही फितरत से खोल दो सब किवाड़ जेल के बहार ही बहार खिली बाहर गुनगुनाओ तुम गीत इनके इनका क्या मधुर संगीत है देखो कभी सब भूल कर के तुमने क्या क्या नहीं खोया है

अनजाना

आकर अगर न मिल पायें न सही हमारा पता पहचान लिया कीजिये कभी बस गुफ़्तगू के नाम ही सही हमसे भी बात कर लिया कीजिये अब नहीं तो तब के नाम ही सही कभी हमें पहचान लिया कीजिये हमारा न सही मौसम का ही सही हाल चाल तो जान लिया कीजिये इतनी भी बेमुरब्बती क्या है हमसे अनजाना समझ बात कर लीजिये

Thursday, May 17, 2012

लापता

उम्र को नहीं अन्दाज़ कभी उम्र का ज़िस्म को है नहीं अन्दाज़ रूह का अब नहीं बन्धन रहा हर बात का हाथ ना अब रहा और कोई हाथ का दिन को नहीं ख़बर तो क्या रात का रात अंधेरी तो जाता क्या रात का हौसलों में है छुपा डर का भी पता है कहाँ तेरी खुदाई ऐ खुदा तू ही बता बन्दों को नहीं बन्दगी का कुछ पता भीड़ में चलते हैं पर ख़ुदी है लापता खुदा ही जाने मतलब सब बात का

Tuesday, May 15, 2012

यूँ ही

तुम फिर उसी तरह हर बार आ जाना यूँ ही मुस्कुराती मेरे तन मन को फिर से मोहक मुस्कान से लुभाती मेरे संग सानिध्य में चल हर पल उसी भांति हर्षाती तुम्हारी उन्हीं अदाओं में नित्य इठलाती बलखाती मेरे अनित्य को नित्य में परिवर्तित सा भी कर देती तुम्हारे संसर्ग में बस मेरी भी हर साँस साँस भी महकाती मुझसे मेरे निज का एक नया सहज परिचय भी करवाती तुम फिर आ जाना हर बार नई नई खुशियाँ बिखराती

Saturday, May 12, 2012

ladders/ सीढ़ी

इतने भी बुरे नहीं हैं हम कि हर एक से बस चिढने लगें ऐसे भी बीमार नहीं हम कि बात बात पर झगड़ने लगें मयस्सर हैं हमें भी वो सब राहें जहाँ हम चाहें बढ़ने लगें ज़रूरी नहीं कि जहाँ भी मिले सीढ़ी वहीँ हम चढ़ने लगें We are not so bad that we start yelling at everyone We are not so sick that we start quarreling everyone Available are all ways to us wherever we want to proceed It's not necessary to start climbing the available ladders