Monday, July 29, 2013


ज़िन्दगी दिन-ब-दिन बस गुज़र सी गई
जेहन में चन्द सवाल अब भी बाक़ी से हैं

है रहा भी कुछ अपने पास देने को कोई
शिक़ायत सभी की अब भी बाक़ी सी हैं

ज्यों भी गुज़री यहाँ अपनी गुज़र ही गई
क्या करें चन्द साँस अब भी बाक़ी सी हैं

गिन के रुसवाईयाँ यहाँ उम्र कटती गई
दिन तो गुज़रे निशाँ अब भी बाक़ी से हैं

मौत से दोस्ती की अब तो ये रुत आ गई
निशाँ-ए-ज़िन्दगी कुछ अब भी बाक़ी से हैं

Sunday, July 28, 2013

ज़िन्दगी को पहचानिए

ज़िन्दगी को जियो ज़िन्दगी की तरह
क्या हक़ीक़त यहाँ उसको पहचानिए
हर लम्हा हर घड़ी ज़िन्दगी है इधर
चार दिन की समझ न भरम कीजिये
अपने अपने हिस्से की किस्मत तो है
साझा किस्मत पे थोड़ा अमल कीजिये
बाँट के कुछ ख़ुशी औरों के साथ भी
उनके हिस्से के थोड़े से गम पीजिये
हर तरफ़ है तो बिखरी मोहब्बत यहाँ
अपने हिस्से में क्या उसको पहचानिए
हुस्न की चाशनी में जब परोसा न हो
इश्क़ ज़ज्बात इसका इलम कीजिये
फ़ूल मिलते ही काँटों की हैं गोद में
दोस्ती काँटों से ज़रा कर के देखिये
बोझ सी जब सताने लगे ज़िन्दगी
ख़ुद भी अपने पे रहमो करम कीजिये


ये तीज क्या आया
श्रीमान वी आइ पी हो गए
हमने रखे सावन के व्रत
वो फूल के कुप्पा हो गए
क्यों न होते भला
पहले सिर्फ पति थे
अब प्राणनाथ हो गए
हम करते रहे दुआएं
उनकी सलामती की
वो थे कि अब दिन में भी
शराबी हो गए
जानते हैं सावन है
हमने उन्हीं के लिए
ये उपवास भी रखा है
लगाम अब ढीली कर दी है
तो बस बेलगाम हो गए
जाने हम भी कब समझेंगे
ये आग मर्दों की लगाई है
हमने जान बुझकर यूँ बस
रीत अब भी निभाई है
इसी ने इनकी हिम्मत
और ज्यादा बढ़ा दी है
संस्कृति के नाम पर
ऐसी सीख दे दी है
ज़रा सा झूले का लालच देकर
हमारी आज़ादी छीन ली है
अब हम तक़ाज़ा करते हैं
हमरी सलामती की दुआ को
इन पर कौन सी रोक लगी है!

Thursday, July 25, 2013


It was just a bit
Unthoughtful of me
I added fuel to fire
For no reason though
I have now realized
Perceptions are mutual
But facts are verifiable
I poked my big nose
Without knowing facts
And their verification
I know!
You too did the same
But I can’t criticize you
As I had done the same
All I can say is
Though it well-meaning
From my side sure
I am embarrassed!

Tuesday, July 23, 2013

Those Managing Thoughts Manage Life well

Much of the success in managing our lives and its various facets depends on how well or badly we managed your thoughts. It's true that we do have the psychological development right from the day we are fetus form; and genetic factors too work on influencing our general persona. However, the thought process is our own to much extent and by doing right interventions we can manage it.

To me, thoughts and attitude make up your aptitude towards the profession, skills, orientation and general interests and behavior in life. In a way what you perceive is governed by your thoughts at the back-end.The evolving of thoughts has many external and internal influences upon. Some of these influential factors are known and some happen without our knowledge.

Our 'metal strength' and 'mental toughness'can be used to overcome the negative thoughts and intervention towards enhancing the positive thoughts is possible. You don't have to believe that everything you perceive is right!At times the evidences or facts are also skewed references to our beliefs. The time, context, and linkage of facts has to be recognized and we must stay away from making subjective and sweeping generalizations.Everything has an 'other side' to it in this World; and opinions are not important when you develop the habit of developing your thoughts!

As we think such becomes our power to perceive things and understand them. This is where working on objective or neutrality of thoughts and understanding comes up. Our preconceived notions, bias and prejudices shall of course remain; yet we have to have open mind and positive thoughts to overcome them all. You don't have to make extra efforts or rigorous preparations to do this; you just have to make yourself believe that what you perceive and the apparent facts you got may be different than the reality.

We have every right to think that we are the best; but with an understanding that so has anyone else. There are negative people, events, factors and situations; but the test of your personality and thoughts is there! If by being positive about all those it helps us and/or others we should be prepared to tell out thoughts that 'yes, it's true; but I would rather be positive about it and be happy to do that'. You may have questions but do questions die down ever? Questions always remain; our thoughts should be mature enough to deal with them to our mental and psychological satisfaction.

There is a famous saying in India that is based on the quote from Swett Marden, "मन के हारे हार है मन के जीते जीत" that means, 'If mind loses we lose; if mind wins we win'! Swett said, 'There are so many people in this World who can't reach the top of the progress merely because they don't have belief in themselves'! Having belief and conviction is very important to manage your thoughts in the right direction. Negative influences on thoughts and problems will come up; it's only normal; you have options to resolve them, deal with them or ignore them.

Life is like a battle and in the battlefields you have to fight with evil or even good at times; ultimately to get the best out of the battle. So is in the process of managing your thoughts. manage your thought and win the battles of life on your own strength! Amen!

तुम और मैं / You and Me

कोई क्षणिक मनमुटाव भी
हमारी काफ़ी बातें अलग हैं
हमें अपनी सोच अज़ीज़ है
हमारे आदर्श टकराते रहे हैं
हमारी पसंद अलग अलग है
नज़दीकियों में कमी नहीं है
अलग अलग हमारी समझ
फ़रक़ हमारे नज़रिये भी हैं
एक अंतराल बाद समझा है
दूरियों में भी नज़दीकियाँ हैं
फिर भी इतनी दूरी ज़रूरी है
समझो एक तुम और एक मैं
Differences too at times
Our ways quite different
We like our own thinking
Our ideals keep clashing
Our tastes way different
Yet being close is no issue
Different understandings
Our outlooks too different
After a while we realized
Distance too is closeness
Yet this distance essential
Know you are one I’m one!

छाप तिलक सब छीनी ~ अमीर ख़ुसरो

छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके
प्रेम भटी का मदवा पिलाइके
मतवारी कर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके
गोरी गोरी बईयाँ, हरी हरी चूड़ियाँ
बईयाँ पकड़ धर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके
बल बल जाऊं मैं तोरे रंग रजव
अपनी सी रंग दीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके
ख़ुसरो निजाम के बल बल जाए
मोहे सुहागन कीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके
छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके॥

Saturday, July 20, 2013

more HAIKU

Feeding children
Mothers go hungry
Selfless love

सबसे जीते
ऐसा ये जीवन
Wins all
Zeal to live
That's life

वाह भौतिकता
करी नैतिकता
Hail materialism
On deathbed
Brought morality

साथी चले गए
अकेला भी
जियूँगा यूँ ही
Partners gone
Even alone
Will live like

जीवन भी असमय
न कालजय
जीवन समन्वय
Life also untimely
Can't win time
Life's adjustment

जो भी जिया
जीवन भरपूर
कैसा क्षणभंगुर
Whatever lived
Lived well
Whither fragility

अलग सही
टकराती नहीं
मेरी आस्था
Sure different
Doesn't clash
My faith

मैं न जिया
अपेक्षा रही
तुम जी लो
I didn't live
As expected
You may live

गुलज़ार चमन
ऐसा उपवन
ये मेरा मन
Abundant flowers
Such a garden
My mind

ये भी अपनी
बंद करो
यूँ व्यथा कथा
Own this too
Stop now
The sad story

सोचा कह दूँ
बदला इरादा
Thought tell you
But then
Changed mind!

तुमने कहा
अविश्वास क्यों
सुना मैंने
You spoke
Why distrust
I heard!

दुनियाँ जागीर
सभी की है
मेरी भी
World is
For everyone
Me too!

मैंने कहना चाहा
तुम चल दिए
बिना सुने
I wanted to say
You left
Without listening!

बिसराकर सबने
यूँ बना दिया
बिसरे कथानक
Forgotten by all
Thus became
Forgotten anecdote!

सोने का होगा
तुम्हारा दिल
देखा नहीं
May be of gold
Your heart
Haven't seen!

डाल की चिड़िया
निहारती अर्श को
आशा में
Bird on branch
Looks at sky
With hope!

तुम्हारी तरह ही
मेरी भी हैं
Just like you
I too have

देखा न था
नज़र पड़ी
अनायास ही
Hadn’t seen
Sighted it

हो न सका
कोशिश मगर की
Didn’t happen
But put efforts
All possible

देखता हूँ
कैसे डगमगाओगे
मेरा विश्वास
Let me see
How you shake
My confidence

तुम्हारी नज़र में
होगी मेरी हार
मेरी नहीं
In your opinion
I would lose
Not mine

आसमान शून्य है
मुझे पसंद है
मेरी ज़मीन
Sky is zero
I like
My Earth

देदीप्यमान है
रौशनी ही रौशनी
मेरे अन्दर
Refulgent around
Lots of light
Inside me

शिला से हैं
लगभग सभी
ये इंसान
Like stones are
Almost all

किसने रोका था
तुम्हीं ने खोया
None stopped
You lost


खुश हैं आज हम इसलिये आज कोई शिकवा न ऐसे करो
वक़्त बिखरा हुआ है यादों में यूँ सवालात हमसे कोई करो

भला कैसे कह दूँ अभी से फिर रंग कल ये लायेगा क्या
आज ही की करो सिर्फ़ बस आज यूँ बात जो भी तुम करो

कल की देखेंगे कल ही आज तुम बस आज में अब जियो
बात मानो संभल जायेगा कल यूँ इसका इत्मीनान करो

ये कल छलावा है कैसे बस जाने छल जायेगा वो हमें
हौसला है हमें देख लेंगे उसे उसके छलने से अब न डरो

Friday, July 19, 2013

शक़ की नज़र / Suspect Eye

हर ओर आलम अब मतलबपरस्ती भ्रष्टाचार का यहाँ
मुद्दतें हुई ख़बर सुने जहाँ कोई मिसाल मन को छू गई
कायल हो गया हूँ अब मैं भी अपनी अक्ल का इधर तो
मुझे हर चीज शक़ की नज़र से देखने की आदत हो गई
Everywhere is abundance of opportunists and corrupt
It's been long since heard news that touched my heart
I'm now becoming admirer of my own wisdom after all
I have got used to see everything with an eye suspect

Thursday, July 18, 2013

छोटे-छोटे जंग / Battles Feeble

ज़िन्दगी में बेवज़ह पहला पत्थर मारने वाला मुझे
सिखा गया कि इस दुनियाँ में ज़ालिम भी भरे पड़े हैं
उसे मालूम नहीं था वह अहसान कर गया मुझ पर
सिखाकर हरेक को ख़ुद छोटे-छोटे जंग लड़ने पड़े हैं
The person who pelted stone at me without a reason
Taught me that World is full of cruel and unjust people
He never knew that he did a great favor to myself then
By teaching me everyone has to fight his battles feeble

Wednesday, July 17, 2013

गेंद तुम्हारे पाले में

कभी तुम पर हँसी आती
कभी क्रोध सा आता है
तुम्हारी क्षुद्र बुद्धि पर फिर
शायद तरस आ जाता है
अब तुम्हें नहीं समझाते
हम भी पले थे नाजों से
तुम्हें अपना सब है याद
यहाँ तक कि कोई भ्रम भी
हमारे बारे में लेकिन तुम
वह सब सोचते भी नहीं
क्या लगता है तुमको
सिर्फ तुम्हें अधिकार है
सब विष्लेषण करने का
अपनी समझ रखने का
अब हम बराबरी चाहेंगे
और भागीदारी निभायेंगे
वरना फिर अब समय है
तुमसे किनारा करने का
अवांछित सही यथार्थ का
गेंद अब तुम्हारे पाले में है

अनदेखा/ unseen

ख़ूबसूरत उन आँखों को कहूँ या पूरे रुख्सार को
बात एक ही है या यूँ कह दूँ कि माहताब है कोई
पर यक़ीनन कैसे कह दूँ कि हक़ीक़त में है कोई
या अनछुआ अनदेखा सा शायद ख़्वाब है कोई
Do I call those eyes beautiful or the whole face
It's the same thing or can I say moonlight it is
But how to say in reality there exists any trace
Or do I say that an untouched unseen dream it is

ख़ुशहाली / Happiness

तलाश न हो जिसे ख़ुशहाल ज़िन्दगी की
ऐसा तो कोई शख्स अभी तक देखा नहीं
क्या होती है ये ख़ुशहाली यहाँ दरअसल
इसका कोई पैमाना अब तक बना नहीं
The ones who aren't looking for happiness in life
I haven't yet seen around many persons like that
In the reality what's that called happiness in life
Haven't found any scale which can measure that

Tuesday, July 16, 2013

विशिष्ट उपलब्धि

हमें प्रायः विशिष्ट उपलब्धियों की चाह रहती है। लेकिन विशिष्ट उपलब्धि के साथ यह समस्या है कि ये कभी कभी होती हैं और हर बार तो कभी भी नहीं। आपने अपना कार्य और कर्तव्य तो यथासंभव बख़ूबी निभाया किन्तु वांछित स्टार का परिणाम न मिलने पर आपको निराश या हताशा भी हुई।

यहाँ समझने और सोचने की बात यह है कि आप जितना कर सकते थे आपने यथ्शक्ति प्रयास भी किये और अच्छे परिणाम भी मिले। सोचने और होने के बीच का फ़र्क़ आप नहीं समझ पाए। परिणामतः आपके अनावश्यक रूप से स्वयं की उपलब्धि पर ग्लानी हुई और यह सोच बनी की यदि ऐसा या वैसा किया होता तो शायद अपेक्षित परिणाम मिल ही जाता।

अब आपने यहाँ तक तो सोच ही लिया किन्तु ये नहीं सोच पाए कि ऐसा या वैसा वर्तमान व भविष्य के विषय हैं भूतकाल के नहीं। भूत में तो जो हुआ वही सत्य है; इसमें कयास नहीं लगाये जा सकते हैं। भूतकाल के परिप्रेक्ष्य में किन्तु, शायद, यदि, परन्तु आदि प्रश्नों और विवेचना का कोई स्थान नहीं होता। जो चीज़ बदलना सम्भव नहीं है उस पर विचार कर अपने मन में हीन भावना ले आना बेमानी है।

विवेक का प्रयोग कर विशिष्ट का प्रयास तो अवश्य करें किन्तु परिणाम आशामुखी न भी हो तो इसमें कोई बुराई नहीं। अपने स्तर पर यथासम्भव प्रयास भी करे; किन्तु सोचने और होने की प्रक्रिया को पहचानें। जो उपलब्धियां हुईं वो भी नहीं या कम हो सकती थीं? यदि हाँ तो संतोष रखें और नए प्रयास और उत्साह के साथ सुधार के प्रयास करें। व्यर्थ चिंता के विचार और स्वयं पर अविश्वास आपमें नकारात्मक सोच ल सकते हैं। इससे बचें और यथार्थ की समझ बढ़ायें।

आपके प्रयास, जीवट और उपलब्धियों के मार्ग में कई बाधाएँ या अवरोध भी होते हैं; जिनका आकलन या अनुमान लगाना हमेशा सम्भव नहीं। सकारात्मक सोच रखें और अपने प्रयास, अपेक्षा और उपलब्धियों के बीच के सामंजस्य की समझ बढायें। सवेरा रोज होता है लेकिन सूरज हमेशा दिखाई दे ये ज़रूरी नहीं। सवेरे के साथ मिली रौशनी को पहचानें। अँधेरा कितना भी घना हो, रौशनी पर हावी नहीं हो सकता। अपने मन के प्रकाश को भी इसी प्रकार जलाये रखें।

आँसू का समन्दर

आँसू के कोई सैलाब नहीं होते
आँसुओं का समन्दर अलग है
इनका नमकीन स्वाद ज़रूर है
पर सिर्फ स्वाद से क्या होता है
समंदर का पानी तो अलग है
आँसू का पर हर क़तरा जुदा है
आँसू में जाने कितने ज़ज्बात हैं
समन्दर में कब कोई ज़ज्बात है
आँसू तो सिर्फ़ अपने खुद के हैं
समन्दर का पानी उधार का है

Sunday, July 14, 2013

People / लोग

बड़े इत्मीनान से ये बोलते हैं झूठ कितने
न तो डर है कोई दोज़ख़ का न साहिब का
यहाँ के लोगों की जो कुछ कहिये कम है
जुर्म खुद करते हैं नाम लेते हैं साहिब का
How confidently do they speak lies always
Neither they are afraid of hell nor the God
More you say about the people here is less
Crimes they do and then swear by the God

Saturday, July 13, 2013

Words / ज़ुबान

मौसम बड़ा हसीन है ये मालूम है हमको
बात करनी ही है तो मज़मून पर की जाए
समझते तो हैं इशारों की भाषा शायद हम
ज़ुबान की अहम है इशारों में क्यों की जाए
Weather is beautiful it's known to me as well
If we talk lets focus on the subject and intent
I may understand the language of indications
But why these hints when words are important

Friday, July 12, 2013


संभाला होश जब बड़ी उम्मीद से जीते आए
हर किसी की ख़ुशी देख हम हमेशा मुस्कुराए
बहारों की बयार को समझते अपने हमसाये
हम इंतज़ार में बैठे जो चाहे हमें उड़ा ले जाए
किसी दरिया की मंझधार से हम जूझते आए
क्या मालूम कब इस दरिया में उफान जाए
किसी समंदर के अन्दर से हैं हम रहते आए
फिक्र होती है कब कौन बड़ी मछली खा जाए
डर नहीं लगता हम डर के साथ में जीते आए
सहारे बस अपने कोहराम हर कोई मचा जाए

Thursday, July 11, 2013

पहचानो / Find Out

तुमको तो हमेशा हक़ है तुम्हारे नज़रिए का
पर एक नज़र देख लो हमारे हाल-ए-दिल का
मोहब्बत से सजा रखा है हर कोना ये दिल का
तुम पहचानो ये हरफ से नाम लिखा किस का
You have every right to your opinion sure
But do glance through once my heart here
Every corner is decorated with all my love
Find if you can whose name it reads here

Wednesday, July 10, 2013


किसी की आह
तुम्हें लग गई
सबको खबर हो गई
Someone's groan
Affected you
Everyone knows

तुम्हें हक़ नहीं
स्वार्थी गिनने का
स्वयं स्वार्थी होकर
You have no right
Counting selfish
Being selfish

कुछ नई नहीं
सबकी तरह है
हमारी कहानी
Nothing new
Like everyone
Our story

मेरा कुछ नहीं
जाने के बाद
तुम्हारा याद करना भी
Nothing is mine
After I leave
Even thy remembrance

तुम्हारे वर्ताव से
मैं असहज हूँ
फिर भी सहज हूँ
Your behavior
Strains me
Yet I'm unstrained

अस्थाई मित्र
अब शत्रु हैं
तुम्हें छोड़ गए
Temporary friends
Are now foes
Having left you

आखिर आये हो
मेरे द्वार
करूँगा सत्कार
Since you came
At my doorstep
Will host you

अब न सही
करोगे पश्चाताप
तुम जाते जाते
If not now
You will repent
While leaving

आज न सही
बहुत करोगे याद
मेरे जाने के बाद
If not today
You will remember
After I leave

अब ये नया राग
क्यों गाते हो
'राग' से प्रेरित हो
Why sing
This new raga
Of bitterness

क्यों चरित्र-ह्रास
तुम भी बनोगे
काल के ग्रास
Why deprave
You too will be
Morsel of time

झांको तुम पहले
काल चक्र में
तुम्हारा भविष्य
You peep into
Time circle
Your future

तुम हुए भ्रष्ट
किसी और के लिए
तुम्हें क्या मिला
You turned corrupt
For someone
You got what

कपट की आग में
जल काला हुआ
तुम्हारा आलोक
In deceit's flame
Burnt turned black
Your Splendor

जलते हो जब
प्रतिशोध में
तुम भी जलते हो
While burning
In revenge
You burn too

चक्षु दोष है
जीता विवेक से
यूँ अविवेक
For sight-defect
Defeated sanity
By imprudence

ज्ञान सुलभ मार्ग
पर सत्य यहाँ
Wisdom facilitates way
But truth prevails
In experiencing

ये कटु आलोचना
तुम्हारा दर्प है
अहंकार हैं
Such bitter criticism
Is your hauteur
Your arrogance

सारी दौलत भी
वही खरीदेगी
दो वक़्त की रोटी
All the riches too
Shall buy you
Two square meals

दुआएं सब की
ढेरों धन्यवाद
मेरी यही दौलत
Good wishes of all
Loads of thanks
Is mt wealth

हजारों नेमतें यहाँ
बिना क़ीमत
Numerous gifts here
Without a price
And priceless

तुम्हारी चरित्रहीनता
पढातीं पाठ
चरित्रहीनता के
Your depravity
Teaches lessons
Of deprave

Friday, July 5, 2013

बेमौसम बरसात / Offseason Cloudburst

फिर भी जाने क्यों अब ज़िक्र से भी डर लगता है
जब से कहर बरपा था बेमौसम बरसात का यहाँ
अब तो बरसात क्या बादलों से भी डर लगता है
Ambitions are still the same there is no change
Yet mentioning them is an scary act for me now
Ever since the cloudburst of the off-season here
Leave aside rains I'm scared of even clouds now

Thursday, July 4, 2013

‘Politics of Fame and Blame’ and Collective Failure in Handling Uttarakhand Disaster

The natural disaster that followed the cloud burst has caused unprecedented havoc in the mountain state of Uttarakhand in India has been the in center focus of news in the country and round the world. The holy places of Hindus, Sikhs and mystics and trekkers have been devastated, with never before natural disaster and deaths of humans and fauna.

The handling and management of the disaster has been dismal and shameful. Thanks to the India’s defense forces and the paramilitary organizations that at least the 110,00 pilgrims who were stranded in the freezing cold and rains without food, water or shelter have been rescued and treated with timely help and supplies.

The gravity of the problem has been worsened with the further torrential rains and bad weather that made the rescue work near impossible. In spite of all odd the pilgrims have been evacuated and the country is mourning about the deaths of at least 11000 people declared dead or missing (albeit the official figures are only about 3000 so far, that no one believes).

The failure of rehabilitation and rescue work for the local people and places was nearly forgotten for some time that caused undue hardships and further losses o the local people. The passing of the blame game is being played among the politicians, the federal and state governments, the interest groups, the civil society and so on. Each one has been trying to score the ‘brownie points’ over the dead bodies of the people and livestock.

In true sense, it has been a classic case of collective failure of handling the disaster of such magnitude. I don’t think even for a moment that one single agency or person can be called responsible for this poor handling and management. In spite of all attempts of political party in power and the opposition leaders and their followers, to malign the image of the other, the truth is they all have focused on their ‘politics of fame and blame’; and have indulged in mud-slinging on each other.
The politicians proved that they are most unreliable and irresponsible and avoidable people in such circumstances. There are ample occasions for politicking and partisan politics; and not over the graves of people they must understand or must be told in no unequivocal terms.

The civil administration must take some leaves out of the defense forces, both in terms of their commitments and efforts to handle the natural disasters of such magnitude. While the best of the engineers of the civil administration failed to make a single bridge (or repair the damaged ones)the unskilled operational staffs of the army and paramilitary made make-shift bridges and temporary structures in no time, with the help of the local populations. The Civil administration failed in all its function in the disaster management, though there were many unsung heroes among them who put their heart and soul in it.

I do hope that all states and central governments and the local bodies etc. (and the people) will have a lot to learn from this disaster in terms of managing and preparedness, as well as the duty towards the nation and fellow nationals.