Monday, December 31, 2012

Wishes/ बधाइयाँ

अन्याय किसी भी प्रकार का हो
उठायें आवाज़ तो उसके ख़िलाफ़
अब तक की अशांति और पाप
न आ पायें कभी भी हमारे द्वार
हम सब लोग अपना लें सदाचार
दूनियाँ से दूर हों सारे अनाचार
मनुज ही नहीं प्राणिमात्र की सोचें
अपने से पहले जग की करें फ़िक्र
स्वयं कुछ ठोस न भी कर पायें
तो करने दें और करने की सोचें
यही है मेरी नव वर्ष की कामना
अपना सकते हो तो लो बधाइयाँ
Injustice be it of any kind
We raise voices against them
Disturbances and sins so far
May never approach our doors
We shall adopt righteousness
May all misdeeds be eradicated
Don't think just for the humans
We think for all living beings
Think of World before ourselves
Even we can't do things concrete
Allow others and thing of doing
These are my new year aspirations
Accept the wishes if you agree!

Saturday, December 29, 2012

खरी खोटी

आज़ ज़माने को कोसने का मन करता हैं
समाज कसौटी में रखने को मन करता है
तुम्हें भी मुझे भी और यहाँ हरेक शख्स को
कहीं न कहीं शरीक़ बताने का मन करता है
बड़ी बेसब्री से सारी व्यवस्थाओं को आज
नोचकर चिल्लाकर जगाने का मन करता है
हम सब को ख़ुद मज़लूम की जगह देखकर
हमारे ज़मीर सदा को जगाने का मन करता है
आज बड़ी साफ़गोई और बेवाकी से ज़रूर
हरेक को खरी खोटी कहने को मन करता है

Friday, December 28, 2012

Candle

कर गई जाते जाते शमाँ की तरह
रोशन इस ज़हान के वज़ूद के रंग
अब भी समय की समझ बाकी है
इन्सान बनो या मरो सब इसी ढंग
With her very sad departure also
She emitted lights like the candle
On crux of times and the humanity
To become human or die like her!

Thursday, December 27, 2012

Difference

व्यर्थ है कयास लगाना
कि मेरी तरह के लोग
और भी हों जो तुम्हारे
वजूद पर करते हैं फख्र
तुम बस अपने मन को
शान्त, इत्मीनान से रखो
तुम्हें हो ख़ुद पर फ़ख्र
सिर्फ इस बात का है फ़र्क
I't useless to presume
Looking for people like me
Who shall be bestowing
Pride on your existence
All you will need to
Balance of mind reassured
That makes you proud of self
That makes the difference!

Tuesday, December 25, 2012

Hatred

नफरत किसे कहते हैं न था कोई इल्म मुझको
चंद वाकयात यहाँ बता गए हैं नफ़रतें मुझको
हाँ मज़लूम के दर्द का भी है बहुत दर्द मुझको
फिर भी है अभी नफरत बस नफ़रतों से मुझको
I was not aware what the hatred was
A few incidents told me what it was
Pained with the victim's agony I was
Yet in hatred with hate I found I was

Saturday, December 22, 2012

Trial Balance

When I have a look at
Balance sheet of my life
Though I get mixed feeling
Yet I do find this lesson
The liabilities are assets too
At least for someone else
There is very thin line between
The assets and the liabilities
The liabilities can be my assets
And vice versa even for myself
Anyways! There don’t exist
Any defined profits or losses
In our lifetimes and in life
Life is just the ‘trial balance’
And nothing more than that
On the hindsight!

Friday, December 21, 2012

इश्क की दास्ताँ/ Tale of Love

इश्क की दास्ताँ तो न बनी कोई अपनी
लेकिन इश्क हो गया दास्ताँ से था हमें
वो बनी भी न थी या कभी सुनी भी न थी
पर सिखा गई वो जाने कितने सबक हमें
Tale of love wasn't there in my case
Yet the tale of love overwhelmed me
It wasn't there and was never heard
Nonetheless gave few lessons to me

Thursday, December 20, 2012

जानते हैं हम

क्या एक स्वप्न से लगते थे
जब तक कि अनज़ान थे तुम
बस स्वप्न ही बुनते रहते हो
ये हकीकत से अनज़ान थे हम
रेगिस्तान में मीठे पानी की
उम्मीद की एक झील थे तुम
समंदर की खारे पानी की एक
तदबीर हो नहीं जानते थे हम
कोशिशों में कमी रखते हो
नहीं कोई जान बूझ के तुम
फिर भी साझेदार तकदीर के
हकीकत ज़रूर जानते हैं हम

Wednesday, December 19, 2012

Haiku

ज़िन्दगी पर
मैं जो हँसने लगा
ज़िन्दगी मुझ पर हँस दी
On life
I started laughing
Life laughed at me!

तुम्हारा आना
ज्यों वसंत महका
मन बहका
Your arrival
Like fragrant spring
Heart wandering

प्यार मँझधार है
भवसागर है
जीवन-सार भी
Love is midstream
It's vast ocean
Essence of life too!

गिरोगे और क्या
तुम गिर चुके हो जब
अपनी निगाह में
What's left
When you have fallen
In your own eyes!

मत दो मुझे
कोई ख़ुदा का वास्ता
परेशान हूँ मैं
Don't give me
Any God's reference
I am stressed!

चार दिन ज़िन्दगी
चन्द ज़िन्दगी के सवाल
सवालों में ज़िन्दगी
Few days’ life
Some questions of life
Life in questions!

हमने भी सुना
तुम्हें ये कहते हुए
तुम महान हो
I did hear
You were claiming
You are great!

हिसाब लेना था मुझे
तुम हिसाब क्या दे पाओगे
पास ज़बाब तक नहीं
I need explanation
What explanation can you give
With not even an answer!

कुछ वे बौखलाये
कुछ हम उत्तेजना में थे
हिसाब बराबर
He yelled
I was also excited
It evened out!

न मालूम कैसे
मुझे रास्तों की नहीं तलाश
रास्ते मिल जाते हैं
Don't know how
I don't look for ways
They are found!

मुझे नहीं मालूम
तुम्हारा अन्तरंग अभिप्राय क्या
मैं अनभिज्ञ ठीक हूँ
I don't know
Your inside intention
Unaware I'm fine!

ज़िन्दगी समझ ले
मैं तेरे आगोश में नहीं
तू आगोश में है !
Thou shall know life
I am not in your arms
You are in arms!

चेहरा आईना नहीं
फितरत हकीकत है तेरी
गलत क्या कहा!
Face isn't mirror
Attitude is your reality
Nothing wrong said!

अपनी नाकामियां छुपाते
लोग देते हैं माहौल और
ख़ुदा का वास्ता!
Hiding their failures
People swear by circumstances
And the God!

बस वही दो लफ्ज़
हम रोज़ दोहराते ही गए
हासिल कुछ न हुआ
Same two words
We kept repeating daily
Nothing we found!

और क्या कह दूँ
ये मन तो मानता नहीं
फिर भी किया एतबार!
What more do I say
The mind doesn't agree to
Yet I trusted you!

इच्छाओं के साथ साथ
उम्र और लालच दोनों बढ़े
एक दिन कुछ नहीं
Along with desires
Greed and age both grew
Nothing in the end!

कैसे कहता मैं कुछ
उनके अविरल वक्तव्य में
अवसर कहाँ था
How could I speak
For there was no scope
During his monologue!

कुछ सुकून है
थोड़ी दवा थोड़ा नशा
है तेरी याद!
Bit of comforting
some medicine and intoxication
Is your remembrance!

ठोकर ही थी
लड़खड़ा ज़रुर गया था
पर गिरा नहीं हूँ!
Just a percussion
And did trip over
But not fallen for sure!

तुम्हारे गुनाह छुपाते
ये पता नहीं चला हमको
कहलाने लगे हम गुनहगार
Hiding your crimes
I couldn't just get to know
I was called delinquent!

जब आयेगी क़यामत
हम खुद देंगे सब हिसाब
तुम भी देख लेना!
On the doomsday
I shall provide the liquidation
You can witness too!

बहुत चाहत थी
दिल लगाने की हमको भी
आशनाई काम न आई
Great desire was there
Falling in love of someone
Concubinage deserted!

सवाल कुछ ऐसे
ज़बाब से और उलझते हैं
ख़ुद से पूछना भी नामुमकिन
Some questions
Get complex with answers
Impossible to ask self!

नहीं मालूम
रज़ा क्या है तेरी
जो भी हो
Don't know
What's your dismission
Be what it may!

ये ज़िन्दगी
अपनी कहाँ थी
न ही रहेगी
The life
Wasn't mine
Nor shall be

बहुत कुछ था
पाया बिरासत में
छोड़ा कुछ नहीं
Found a lot
In the inheritance
Left nothing

हर नेता का
चेहरा एक मुखौटा
बेपेंदी का लोटा
Every politician
Wearing masks
A rolling utensil

प्रश्नोत्तर में उन्मुक्त
निष्छल हँसी
मानो मुझ पर हँसी
Answering with
Unclouded innocent smile
As if laughs at me!

ख़्वाब था
क्या अफ़सोस है
जो टूट गया
Just a dream
Why feel sorry
When broken!

कैसे महकेंगे
गुलोँ से ख़ुशबू
हो गई चोरी
Whither fragrance
Perfume of flowers
Is stolen!

भेड़िये ज्यों
खाल में भेड़ की
मुखौटों में लोग
Like wolf
In skin of sheep
Guys in masks!
हिचकिचा कर सही
जो न कहा
कह तो दिया
Albeit hesitantly
The unsaid
At least said now!

मेरा किया
सुना मैंने तुमसे
तुम्हारा किया
My efforts
I heard from you
As your efforts!

Devils Unknown

मंज़िलों की तलाश में मुसाफ़िर बन भटकता रहा
हर ओर नया रास्ता और भी अनज़ान लगता रहा
बेशक़ फ़ख्र सा कुछ था नहीं बस सफ़र ज़ारी रहा
हर तरफ़ इन्सान भी कहीं हैवान सा था बसता रहा
In search of destinations wandered like a traveler
Everywhere new paths sounded like the unknown
There was nothing proud to be just travel continued
All around some humans sounded like devils unknown

Tuesday, December 18, 2012

मौन मानवता

उसने कभी सोचा भी न था
कभी ये होगा उसके साथ
ये हंसती खेलती ज़िन्दगी
अभिशप्त हो जाएगी उसकी
बलात्कारियों की हवस से
कुछ संवेदनाओं के चलते
बस आलोचनाओं के बाद
सब स्वर मौन हो जाएंगे
व्यवस्था में सुधार के नाम
सब दोषी भयमुक्त घूमेंगे
मूक न्याय व्यवस्था में
मौन हुई मानवता के बीच
उसकी चीखें दब जाएँगी
उसकी व न्याय की दृष्टि में
सर्वस्व नष्ट चाहिए अवश्य
बिना अपवाद दोषियों का
शायद तभी संभव होगा कि
ये सब फिर दोहराया न जाए
उसकी जैसी अन्य के साथ

Monday, December 17, 2012

इतना ही

तुम्हारी संवेदना भी शायद
बस पाषाण सी हो गई हैं
एक कठोर ह्रदय की भाँति
कारण मैं नहीं जानता हूँ
तुम्हारे नूतन प्रतीक को
मैं नहीं समझना चाहता हूँ
तुम्हारा मंतव्य या कारण
मैं स्मरण दिलाना चाहता हूँ
मेरा सुझाव भी नहीं मानोगे
मैं अवश्य यह भी जानता हूँ
तुम्हीं आत्म-मंथन कर लो
इतना ही समझाना चाहता हूँ

Utterances

तुम्हारे वादे और तुम्हारे मुक़रने के ये अंदाज़
और कितना छलोगे हमको आकर हमारे पास
रहने दो ये अपनी सियासत के सुर अपने पास
हम ख़ुद कर लेंगे गुज़ारा अब तो यही है आस
Your promises and the ways of going back on them all
How long will you fool us by coming back to us again
Leave aside these utterances of politics with yourself
We do know we can help ourselves whatever is to gain

Noise!

मेरी खामोशियों को तुम कुछ भी न समझ लेना
बहुत शोर बसता है इन्हीं खामोशियों में अब मेरी
जो भी समझो मतलब न समझ लेना तुम ख़ुद ही
बहुत से मतलब हैं समेटे इन खामोशियों ने मेरी
Do not attach yourself any meanings to my silence
A lot of noise exists around in my very being silent
Whatever you understood may not be a conclusion
Many meanings can be attached to my being silent

Sunday, December 16, 2012

Matters of Soul

Some things are different from others
Some people more similar than others
Brave are the people who can observe
Reasoning of their trends or a pattern
Uninhibited ways of the behavioralism
Orderly or the weird ones many ways
Your graphic visuals of life’s statistics
The trets and frets and the better days
The differential treatment or behavior
In cases of the similarly placed persons
The explanations are rather so difficult
Many times in the matters of the soul

Saturday, December 15, 2012

ग़ालिब साहब ..:):)

रहिये अब ऐसी जगह चलकर, जहाँ कोई न हो,
हमसुखन कोई न हो, और हमज़ुबाँ कोई न हो ..

बेदर-ओ-दीवार सा इक घर बनाना चाहिए
कोई हमसाया न हो, और कोई पासबाँ न हो ..

पड़िये गर बीमार, तो कोई न हो तीमारदार
और अगर मर जाइये, तो नौहख्वां कोई न हो .."

ग़ालिब साहब ..

हमसाया - Neighborhood / पड़ोसी
पासबाँ - Watchman / प्रहरी
नौहख्वां - Mourner / रोनेवाला, विलाप करने वाला

निशाने

औरों की तो नहीं
किन्तु हमारी अपनी
शालीनता व शिष्टाचार के
हम स्वयं हैं प्रहरी
दूसरे भी हो सकते है
प्रेरित हमसे भी
इस ओर या उस पार
इसके ज़िम्मेदार
हम भी हो सकते हैं
इसके पहले कि हम
उठायें ऊँगली औरों पर
उनकी उँगलियों के
निशाने की दिशा में
हम भी हो सकते हैं

Thursday, December 13, 2012

ज़रूरत से ज्यादा

मैं तो अपनी आवाज़ बढ़ाते रहा
पर कोई प्रत्युत्तर नहीं मिला था
मुझे लगा मेरी आवाज़ में अब
उन्हें सन्नाटा प्रतीत हो रहा था
शायद उनका ध्यान व्यस्त हो
मैं अब भी कुछ तो आश्वस्त था
मेरे लिए वस्तुस्थिति अष्पष्ट थी
किन्तु उन्हें सब कुछ स्पष्ट था
उनके व्यव्हार से सब स्पष्ट था
एक मैं समझ नहीं पा रहा था
ज़रूरत से ज्यादा आशावादी मैं
उनकी नज़र में तो मूर्ख था

Tuesday, December 11, 2012

परिभाषा

मैं लिखता ही रहा
अपने सब अल्फाज़
लम्बे लम्बे जुमलों में
इसी हसरत में कि शायद
तुम पढ़ ही लोगे कभी
इनमें छुपे अहसास मेरे
किन्तु ये भूल थी मेरी
शायद कुछ अलग ही थी
इस मेरी भाषा से
तुम्हारी अपनी परिभाषा

Sunday, December 9, 2012

बेसुरा

कभी कभी तो कुछ भी कहने को यहाँ
पूरी आज़ादी से जीने का जी करता है
सुर के कद्रदानों को बेअसर करने को
आज फिर बेसुरा होने को जी करता है
दिल के हाथों शायद कुछ भी न मिला
आज बग़ावत करने को दिल करता है
आज नगमों से अदावत होती है मुझे
आज कुछ न कहने को जी करता है
देखकर ये ज़माने के रस्म ओ रिवाज़
सारे वादों से मुक़रने को जी करता है

Amazing Hindi Poet's Imagination.. by: Om Prakash Aditya

मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,
तुम एम. ए. फर्स्ट डिविजन हो, मैं हुआ मेट्रिक फेल प्रिये,
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,

तुम फौजी अफसर की बेटी , मैं तो किसान का बेटा हूँ,
तुम रबड़ी खीर मलाई हो , मैं तो सत्तू सपरेटा हूँ,
तुम ऐ. सी. घर में रहती हो , मैं पेड़ के नीचे लेटा हूँ,
तुम नई मारुती लगती हो , मैं स्कूटर लम्ब्रेटा हूँ ,

इस कदर अगर हम चुप-चुप कर, आपस में प्रेम बढ़ाएंगे ,
तो एक रोज़ तेरे डेडी, अमरीश पुरी बन जायेंगे,
सब हड्डी पसली तोड़ मुझे, भिजवा देंगे वो जेल प्रिये ,
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,

तुम अरब देश की घोड़ी हो , मैं हूँ गदहे की नाल प्रिये ,
तुम दीवाली का बोनस हो , मैं भूखों की हड़ताल प्रिये ,
तुम हीरे जड़ी तश्तरी हो , मैं अलमुनियम का थाल प्रिये ,
तुम चिकन-सूप बिरयानी हो , मैं कंकड़ वाली दाल प्रिये ,
तुम हिरन -चोकड़ी भरती हो , मैं हूँ कछुए की चाल प्रिये ,
तुम चन्दन -वन की लकड़ी हो , मैं हूँ बबूल की ड़ाल प्रिये,
मैं पके आम सा लटका हूँ , मत मारो मुझे गुलेल प्रिये ,

मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,

मैं शनि -देव जैसा कुरूप , तुम कोमल कंचन काया हो ,
मैं तन-से मन-से कांशी राम , तुम महा चंचला माया हो ,
तुम निर्मल पावन गंगा हो , मैं जलता हुआ पतंगा हूँ ,
तुम राज घाट का शांति मार्च , मैं हिन्दू -मुस्लिम दंगा हूँ
तुम हो पूनम का ताजमहल , मैं काली गुफा अजन्ता की ,
तुम हो वरदान विधाता का , मैं गलती हूँ भगवंता की ,
तुम जेट विमान की शोभा हो , मैं बस की ठेलम -ठेल प्रिये ,

मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,

तुम नई विदेशी मिक्सी हो , मैं पत्थर का सिलबट्टा हूँ ,
तुम ए. के. सैंतालिस जैसी , मैं तो इक देसी कट्टा हूँ ,
तुम चतुर राबड़ी देवी सी , मैं भोला -भाला लालू हूँ ,
तुम मुक्त शेरनी जंगल की , मैं चिड़ियाघर का भालू हूँ ,
तुम व्यस्त सोनिया गाँधी सी , मैं वी. पी. सिंह सा खाली हूँ ,
तुम हंसी माधुरी दीक्षित की , मैं पुलिसमेन की गाली हूँ ,
कल जेल अगर हो जाए तो दिलवा देना तुम बैल प्रिये ,

मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,

मैं ढाबे के ढाँचे जैसा , तुम पांच सितारा होटल हो ,
मैं महुए का देसी ठर्रा, तुम रेड -लेबल की बोतल हो ,
तुम चित्रहार का मधुर गीत , मैं कृषि-दर्शन की झाडी हूँ ,
तुम विश्व -सुंदरी सी कमाल , मैं तेलिया छाप कबाड़ी हूँ ,
तुम सोनी का मोबाइल हो , मैं टेलीफोन वाला हूँ चोंगा ,
तुम मछली मानसरोवर की , मैं सागर तट का हूँ घोंघा ,
दस मंजिल से गिर जाऊँगा , मत आगे मुझे धकेल प्रिये ,

मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,

तुम सत्ता की महारानी हो, मैं विपक्ष की लाचारी हूँ,
तुम हो ममता -जयललिता सी , मैं क्वारा अटल बिहारी हूँ ,
तुम तेंदुलकर का शतक प्रिये , मैं फोलो ओन की पारी हूँ ,
तुम गेट्ज , मेटिज़, करोला हो, मैं लीलैंड की लोर्री हूँ ,
मुझको रेफरी ही रहने दो , मत खेलो मुझसे खेल प्रिये ,
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,

मैं सोच रहा की रहे हैं कबसे , श्रोता मुझको झेल प्रिये ,
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये.

Saturday, December 8, 2012

New Power

We never believed it would be so
That definition of progress as such
The wealth being the parameters
Might ones would be right so much
Individuals prevail over everything
Leaving at back burner others kept
The shine and sounds of the shoes
Of combatant army when parading
Superior powers those with them
Weapons’ arsenal to kill en mass
Ways to take always precedence
Over their means furthering ends
Self to be the mottos themselves
Egos keep clashing with the prides
Diplomacy a synonym of threats
Politics the betrayal of the people
Relationships weighing with lust
Breaking family and social bonding
Leaving the responsibility of those
People destitute, poor and the old
Nothing else to matter except gold
More becoming less always for all
Serene locations converting to cities
Redefining jungles with concrete
Abuse of all laws and authorities
In the name of serving the people
Each one trying the fool other one
Becoming the order of New Power

Friday, December 7, 2012

Early Warning


Temporary upsets exist
Life has its own reasoning
Stay calm and composed
When life starts sobbing
Only to check retrospect
For your ways improving
Seeking possible remedy
By you for self-analyzing
Allows you an opportunity
To fix the issues burning
We all have to appreciate
It gives you early warning
Sure at the end of the day
We have to make it smiling
Keep you on test often is
It’s one of the best things

Thursday, December 6, 2012

टाल मटोल

आशा तो थी और निश्चय भी था
मगर बात थी कुछ बनती नहीं
कर्म का क्रम बन रुक जाता था
जिज्ञासा मग़र बुझती थी नहीं
काम सरल था शुरुआत पर भी
मुश्किल कुछ ऐसी तो रही नहीं
बस टाल मटोल का आलम था
कल आना था कोई आसान नहीं
कब से लम्बित था जाने काम
गम तो था रहता पर बना नहीं
आज के आज कर बन ही गया
कल कल कर जो था हुआ नहीं

Wednesday, December 5, 2012

कुछ तो

इन सर्द हवाओं के इस मौसम में
तुम कुछ तो यहाँ गर्म भी रहने दो
सर्द हो चुके अंदाज़ तुम्हारे माना
अल्फाज़ व ज़ज्बात गर्म रहने दो
The air of the weather is blowing cold
You must try leaving some thing warm
Your ways too have turned cold I agree
Al least keep words and emotions warm

आखिरकार / after all

मुझको ज़माने से ज़माने को मुझसे
हमेशा रहेंगी ही उम्मीदें आखिरकार
ज़माना साथ तो देगा शायद अक्सर
पर हाँ मुझे मेरे हाल में ही छोड़कर
World and me both will always have
All hopes from one another after all
World would be by my side perhaps
But will leave me on my lot after all

Tuesday, December 4, 2012

परछाइयाँ / Shadows


जब से होने लगा है तनहा ये आशियाँ
होती नहीं आस पास कोई परछाइयाँ
अब बेबसी कहो या मेरी मजबूरियाँ
रास आने लगी हैं मुझको तनहाइयाँ
Ever since loneliness surrounded my living
Not even shadows are around my dwelling
Call it my helplessness or call my fettering
Loneliness around me I have started liking

आगाज़

ये मालूम है तुमको भी
तुम्हारे हमारे दरमियाँ
कल भी बहुत कुछ था
आज भी बहुत कुछ है
तुम्हें एहसास हो न हो
मगर हमको तो बहुत है
हमें है अज़ीज़ मोहब्बत
तो तुम्हें रंजिश बहुत है
हमारे लिए अंजाम नहीं
बस आगाज़ ही बहुत है

Monday, December 3, 2012

सहज

दूसरों की नज़र में तोल ख़ुद को कभी
खुद की फ़ितरत के रंगों को देखा करो
जीने के सबक़ रख सब जेहन में ज़रा
बात जब भी अगर ज़िन्दगी की करो
सँग सँगी का न हो अजनबी का सही
हर सफ़र में न मंजिल को देखा करो
हो सहज अपने जीवन में हर क़दम
तुम ज़िन्दगी के सहज रूप देखा करो
ज़िन्दगी को शिकायत न समझा करो
ज़िन्दगी हँसते हँसते निक़ल जाएगी
गम की आहट अगर दे दस्तक कोई
गम न कर ये घडी भी गुज़र जाएगी

Sunday, December 2, 2012

ज़िन्दगी सा कुछ नहीं

कभी मैं परेशानियों में समझता
ज़िन्दगी बोझ के सिवा कुछ नहीं
ख़ुशियों के पलों में ये लगता था
इससे ख़ूबसूरत और कुछ नहीं
संजीदा लम्हों में महसूस होता
जीना हक़ीक़त है और कुछ नहीं
कुल मिला के देखा तो पाया मैंने
ज़िन्दगी तुम सा कुछ भी नहीं

Saturday, December 1, 2012

Humanity?

बस अपने छोटे से फ़ायदे की ख़ातिर यहाँ
लोग ज़िन्दगी बरबाद कर देते हैं औरों की
ख़ुदा का क़हर कभी उन पर बरपेगा ज़रूर
तब वो देंगे दुहाई औरों को इंसानियत की
For petty personal benefits of their own
Some people spoil the lives of the others
Heavenly curse will fall upon them one day
And then they will swear by the humanity!

Friday, November 30, 2012

Exacerbate

The failures must exacerbate
Resolve to persevere always
To achieve excellence aspired
It would bolster your efforts
Nudging bad consequences
Keeping the negativity aside
Learning the innovative ways
So temporary are the failures
And integral part of process
If the current effort does not
The renewed one succeeds
Choosing from assorted paths
Redundant are the singulars
Life is always full of options
So are the goals and targets
Move on in path of success

Thursday, November 29, 2012

माद्दा

समन्दर न सही दरिया का पानी से बहते हैं हम
अपना रास्ता ख़ुद बनाने का माद्दा रखते हैं हम
हवाओं के रुख बदलने का हौसला रखते हैं हम
क़ामयाबी न भी मिले तो कोशिश करते हैं हम

जो कहा नहीं गया -- अज्ञेय

है, अभी कुछ और जो कहा नहीं गया।

उठी एक किरण, धाई, क्षितिज को नाप गई,
सुख की स्मिति कसक-भरी, निर्धन की नैन-कोरों में काँप गई,
बच्चे ने किलक भरी, माँ की वह नस-नस में व्याप गई।
अधूरी हो, पर सहज थी अनुभूति :
मेरी लाज मुझे साज बन ढाँप गई-
फिर मुझ बेसबरे से रहा नहीं गया।
पर कुछ और रहा जो कहा नहीं गया।

निर्विकार मरु तक को सींचा है
तो क्या? नदी-नाले ताल-कुएँ से पानी उलीचा है
तो क्या? उड़ा दूँ, दौड़ा दूँ, तेरा हूँ, पारंगत हूँ,
इसी अहंकार के मारे
अंधकार में सागर के किनारे ठिठक गया : नत हूँ
उस विशाल में मुझ से बहा नहीं गया।
इसलिए जो और रहा, वह कहा नहीं गया।

शब्द, यह सही है, सब व्यर्थ हैं
पर इसीलिए कि शब्दातीत कुछ अर्थ हैं।
शायद केवल इतना ही : जो दर्द है
वह बड़ा है, मुझ से ही सहा नहीं गया।
तभी तो, जो अभी और रहा, वह कहा नहीं गया।

--अज्ञेय

सिफ़र / Zero

जो पाया है वो बहुत कुछ खो कर
जो जीते हैं तो बहुत कुछ हार कर
पा कर याद आता है जो खो चुका
जीत कर याद आता है हारा हुआ
कुल मिला कर जोड़ घटा बराबर
आखिर में सब को सिफ़र मिला है
बस इसी उधेड़बुन में सिमटा हुआ
ज़िन्दगी का हर फ़लसफ़ा ठहरा है

Whatever gained is by losing a lot
Whatever found by many things lost
Once found we remember what is lost
Victories too remind us battles lost
Everything comes by scores evened out
At the end everyone adds to a naught
Thus is a maze of our confused thought
All philosophies of our life have taught

Wednesday, November 28, 2012

ज़बाब

जब भी मैं ज़बाब ढूँढता हूँ
बस प्रश्नों में उलझ जाता हूँ
हर बार पूछना चाहता हूँ
मग़र खामोश रह जाता हूँ
और भी अनजान लगता हूँ
जितना नज़दीक़ आता हूँ
जितना मैं दूर जाता हूँ
उतना ही करीब पाता हूँ
कुछ प्रश्नों के ज़बाब नहीं होते
यही मानकर चुप हो जाता हूँ

Tuesday, November 27, 2012

नज़दीकियाँ

जाने क्यों तुमसे मेरे रिश्ते यूँ कम हैं
शायद इसीलिए तो हम दोनों ही हम हैं
लोग बैठे हैं रिश्तों की क़तार में लम्बी
कुछ से ज्यादा कई से दूरियाँ कम हैं
फिर भी जाने क्यों सभी से अपनी
दिल की थोड़ी सी नज़दीकियाँ कम हैं
किसने क्या लिया यहाँ से क्या लेना
अपना चलता रहा सफ़र ये क्या कम है
न नसीब हो इस ज़हाँ में और कुछ भी
वक़्त अपने साथ वक़्त के साथ हम हैं

Monday, November 26, 2012

Moments

Problems will come by
Not stay forever around
I have to deal with them
Chase them away ever

New ones may come too
I shall chase away again
Solutions are always there
I will make them balance

Moments of sadness too
I will deal with them too
My all happy moments
Will sure outweigh them

Negative thoughts come
Only to test my resolve
I have my own thoughts
They will overpower them

Criticisms will be there
I will learn from them
I know I am not perfect
Also no perfect world

Will thank my all critics
For their prompting me
To introspect and mend
My ways or my methods

I will be learning from all
Without ego or prejudices
Whatever the provocation
I will retain my happiness

Saturday, November 24, 2012

Humane

या मोहब्बत कुछ यूँ बसा अपनी बस्तियों को
साहिल तक ले आयें लोग अपनी क़श्तियों को
तेरी आरजू ने इन्सान बना डाला है कईयों को
ऐ ख़ुदा कुछ अक्ल से तू यूँ नवाज़ बाकियों को
O Love! Try and make your habitat at such places
People bring their boats to banks not midstream's
Thy desire has made many people act like humans
O Lord! You bestow some wisdom on to the others

Love Evolves and Perishes


Story of love in lives of people
Has some trends of evolution
Starting with the innocent love
Love becomes possessive then
Younger days love can be crush
Now the love for the individuals
Initially it’s a mysterious feeling
The new kind of emotion coming
Lost in sweet thoughts visualizing
Feeling of love and the fantasizing
Wonderful counting of moments
Unaware of times and the people
Living without time dimensions
Then comes the new kind of love
Passion and lust redefining love
A phase of more self centralism
Having passed this phase again
Meanings of love get broadened
Encompassing the surroundings
The people in your lives around
The evolution doesn't stop here
Next phase of 50’s and beyond
Loving companion is the thought
The reciprocation is also imminent
The spiritual love is also enhanced
And finally love and body perishes
But the story of love sure repeats!

Friday, November 23, 2012

Expose

जब हट चुका है चेहरे से तुम्हारे यह मुखौटा
कहते हो तुम कि हमें अब कर दोगे बेनक़ाब
हमने तो की ही नहीं कभी इस्तेमाल नक़ाब
इसलिए तुम जैसे क्या हमें करेंगे बेनक़ाब
Now when you have been unmasked comprehensively
You dare to say that you will now expose myself
You know I never used any veils, mask or covers
People like you can find nothing to expose myself

Thursday, November 22, 2012

गूँज

सुनता रहा हूँ मैं कोलाहल हर वक़्त
इन मोहब्बत से लबरेज़ ज़ज्बातों का
फ़िर भी अंतर्मुखी ही रहता हूँ शायद
तुम्हें एहसास तो होगा इन बातों का
जाने क्यों नहीं आता मुझे पीटते रहना
हर किसी की तरह ढोल उल्फत का
सैलाब तो बसा रखा है अपने अन्दर
अपने ही ढंग से बेपनाह मोहब्बत का
मेरी अपनी दुनियाँ बड़ी छोटी तो नहीं
पर सिमटा हुआ है संसार हकीकत का
मेरा मेरे पास बस एक बड़ा खज़ाना है
बस तुम और तुम्हीं से मोहब्बत का
मेरे अनकहे अल्फाज़ गूँजते तो होंगे
तुम्हें एहसास तो होगा इन बातों का

लम्हा लम्हा

लम्हा लम्हा चलते चलते
कभी रोते और कभी हँसते
हम इतनी दूर आ पहुँचे
अनजाने में दिल दुखाते
तो जानबूझ कर सहलाते
खट्टे मीठे अनुभव लिए
हम इतनी दूर आ पहुँचे
शिकवे कभी शिक़ायतें
झगडे भी और झिड़कियाँ
फिर भी प्रेम भाव लिए
हम इतनी दूर आ पहुँचे
अब ढलती उम्र में दोनों
अब यही है बस ख्वाहिश
बस गिले शिकवे करते
पर बढ़ते प्रेम भाव से हम
जितनी भी दूर हो संभव
हम उतनी दूर जा पहुँचें

Tuesday, November 20, 2012

तलाश

बिना सोचे समझे मैं चलता जा रहा हूँ
न जाने किन गलियों में भटक रहा हूँ
दिशा का भान है मुझको ये भी सच है
लेकिन दिशाहीन सा चलता जा रहा हूँ
मेरा कोई लक्ष्य नहीं कोई गंतव्य नहीं
बस जहाँ क़दम मुड़ गए चला जा रहा हूँ
रास्ते मेरे लम्बे या छोटे बनते जा रहे हैं
अंतहीन सफ़र में कहीं बढ़ता जा रहा हूँ
दुनियाँ की हक़ीक़तों से मैं उलझ रहा हूँ
मुझे नहीं मालूम किस ओर जा रहा हूँ
लोग सोचते हैं सब कुछ पा लिया मैंने
मैं आज भी कहीं ख़ुद को तलाश रहा हूँ
अपने ही भीतर अनजाना तलाश रहा हूँ
अब ज़िन्दगी का मतलब तलाश रहा हूँ

Monday, November 19, 2012

अपना साथ काफ़ी है

दिन तो ढलेगा इसका क्या
चाँद की रौशनी ही काफी है
अमावस की रात है तो क्या
जुगनुओं की तो आपाधापी है
रात अगर अँधेरी है तो क्या
सितारों की चमक बाकी है
सफ़र अकेला सही तो क्या
हमसफ़र की तलाश बाकी है
हमसफ़र न हो तो न ही सही
हमारा सफ़र अब भी बाकी है
कोई भी साथी न हो तो क्या
हमारे लिए अपना साथ काफ़ी है
वक़्त या शरीर दगा दे तो क्या
हौसलों का असर तो बाकी है

आत्मसम्मान

ये भली भाँति मालूम था मुझे
वो तसल्ली दे तो रहे थे मुझे
किन्तु मंतव्य कुछ अलग था
और उनकी दृष्टि में कदाचित
मेरी वह पीड़ा उचित ही थी
स्वाभिमान व आत्मसम्मान
उनके स्वयं के लिए बेमानी थे
औरों को व्यावहारिक होने के
पाठ पढ़ाना उनको प्रिय था
अपनी ही दृष्टि में उन्हें अवश्य
इससे इतर आचरण का दंड
स्वाभाविक एवं न्यायोचित था
मानता हूँ उनका एक दृष्टिकोण था
किन्तु औरों के दृष्टिकोण के प्रति
उन्हें भी संवेदनशील होना ठीक होता

Sunday, November 18, 2012

झाँसी वाली रानी: सुभद्राकुमारी चौहान द्वारा रचित अविस्मरणीय वीर गाथा.........

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।

चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

कानपूर के नाना की, मुँहबोली बहन छबीली थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी,
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी।

वीर शिवाजी की गाथायें उसको याद ज़बानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
नकली युद्ध-व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवाड़|

महाराष्ट्र-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में,
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाई झाँसी में,
सुघट बुंदेलों की विरुदावलि-सी वह आयी थी झांसी में,

चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव को मिली भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियाली छाई,
किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई,
रानी विधवा हुई, हाय! विधि को भी नहीं दया आई।

निसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

बुझा दीप झाँसी का तब डलहौज़ी मन में हरषाया,
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया,
फ़ौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया,
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया।

अश्रुपूर्ण रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

अनुनय विनय नहीं सुनती है, विकट शासकों की माया,
व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया,
डलहौज़ी ने पैर पसारे, अब तो पलट गई काया,
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया।

रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

छिनी राजधानी दिल्ली की, लखनऊ छीना बातों-बात,
कैद पेशवा था बिठूर में, हुआ नागपुर का भी घात,
उदैपुर, तंजौर, सतारा,कर्नाटक की कौन बिसात?
जब कि सिंध, पंजाब ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात।

बंगाले, मद्रास आदि की भी तो वही कहानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

रानी रोयीं रनिवासों में, बेगम ग़म से थीं बेज़ार,
उनके गहने कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार,
सरे आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार,
'नागपुर के ज़ेवर ले लो लखनऊ के लो नौलख हार'।

यों परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

कुटियों में भी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान,
वीर सैनिकों के मन में था अपने पुरखों का अभिमान,
नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान,
बहिन छबीली ने रण-चण्डी का कर दिया प्रकट आहवान।

हुआ यज्ञ प्रारम्भ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी,
मेरठ, कानपुर,पटना ने भारी धूम मचाई थी,

जबलपुर, कोल्हापुर में भी कुछ हलचल उकसानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

इस स्वतंत्रता महायज्ञ में कई वीरवर आए काम,
नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम,
अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम।

लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

इनकी गाथा छोड़, चले हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,
लेफ्टिनेंट वाकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुया द्वंद असमानों में।

ज़ख्मी होकर वाकर भागा, उसे अजब हैरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार।

अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

विजय मिली, पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुहँ की खाई थी,
काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी,
युद्ध श्रेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी।

पर पीछे ह्यूरोज़ आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

तो भी रानी मार काट कर चलती बनी सैन्य के पार,
किन्तु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गये सवार,
रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार-पर-वार।

घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर गति पानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

रानी गई सिधार चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आयी बन स्वतंत्रता-नारी थी,

दिखा गई पथ, सिखा गई हमको जो सीख सिखानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

जाओ रानी याद रखेंगे ये कृतज्ञ भारतवासी,
यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनासी,
होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी।

तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

Dreamz

How beautiful they feel
And important to all
If they do come true
It's always fascinating
If they don’t become real
No harm done whatsoever
They are just random sequences
Yet they are rejuvenating
Thought provoking too
And bring around hopes
To people and their enthusiasm
To improve or excel
If not in the longer term
At least momentarily!

only smiles

रात गई बात गई इत्मीनान बनाये रखिये
देखिये तो आज की सुबह कितनी हसीन है
ये तेवर किसी और के लिए संभाले रखिये
हमें तो आपकी बस मुस्कराहट अज़ीज़ है
The dark night is over be rest assured
Wow! See that fantastic morning it is
Preserve frowning mood for someone
I for one like to witness your smiles

Friday, November 16, 2012

Words from China's new leader Xi Jinping's first message

Words from China's new leader Xi Jinping's first message

"Our people have an ardent love for life. They wish to have better education, more stable jobs, more income, greater social security, better medical and health care, improved housing conditions, and a better environment. They want their children to have sound growth, have good jobs and lead a more enjoyable life. To meet their desire for a happy life is our mission."

"just as China needs to learn more about the world, so does the world need to learn more about China."

China has excelled in many fields; but the biggest challenge for them now would be the bridging the gap between the income levels of the people. Just like in capitalist systems the disparities of income of people will pose a challenge to deal with. They may have good examples to learn from the British and some European nations on the social security systems (something that Gorbachev got impressed with; but went too fast in perestroika that gave other ideas to politicians like Yeltsin to oust him and grab the power)!

Of course now there is nothing called capitalist or Socialist regimes; all have matched and mixed the blend of both.Once the bread and shelter is available, human beings like to look for the liberty and more rights. Can the 'socialistic, China look for the wider answers to the aspirations of the people?

reward

तुमसे मिलकर दिया ख़ुद को ईनाम
अपनी वजूदगी ही गुमनाम कर दी है
और क्या तवज़्ज़ो देते हम तुम पर
अपनी उम्र जो तुम्हारे नाम कर दी है
On meeting you I rewarded myself
Of losing all my very own 'existence'
What more could I have given focus
I transferred my whole age in your name

Tuesday, November 13, 2012

दीवाली

पटाखों की धूम धड़ाम में
मानो कहीं खो रहा सा था
दीप प्रकाश उत्सव दीवाली
हर तरफ प्रतिद्वंदिता सी थी
और ज्यादा शोर मचाने की
ये कैसी विचित्र है ख़ुशहाली
मिलने मिलाने में बस उपहार
आदान प्रदान का क्रम बढ़ा है
देखा-देखी हुई बहुत खर्चीली
बहुतों को अब नया शौक़ है
चकाचौंध में भूल जाने का
किसी की अँधेरे में दीवाली

Sunday, November 11, 2012

This Diwali


This Diwali; the festival of lights
I’m looking for within more lights
Without prejudice to the others
Just looking for contributing bits
In this wonderful World’s people
Of no dislikes and only the likes
Things and happening around me
I need to work on first, who else
Without bothering if others join
I shall perceive this path chosen
To brighten my inner-self around
And sharing path of enlightening
Wish me the luck I presume that
Same! I want you to presume that

Thursday, November 8, 2012

अलग सा क्यों


आज भी वही सफ़र वही संग है
फिर सब कुछ अलग सा क्यों है
वही साज और आवाज़ वही है
संगीत का सुर अलग क्यों है
कागज़ वही रोशनाई वही है
लिखने का ढंग अलग क्यों है
महबूब वही राजदान वही है
मोहब्बत का रंग अलग क्यों है
देश वही और परिवेश वही है
फिजां का रंग अलग क्यों है
मेरे अल्फाज़ आज भी वही हैं
समझने का ढंग अलग क्यों है
कहीं कुछ बदले हुए अंदाज़ हैं
शायद तभी ये हौसला बुलंद है

Tuesday, November 6, 2012

आश्वस्त

समझ नहीं पाया हूँ मैं
ये तुम्हारा दृष्टि-दोष है
या अनधिकार चेष्टा है
मुझे आहत कर देने की
अपने इन दृष्टि-वाणों से
अकस्मात् पर सप्रयास
मैं चकित नहीं भ्रमित हूँ
किंकर्तव्यविमूढ़ भी हूँ
मेरी समझ से जाऊं क्या
या सोच का करूँ भरोसा
ये भी नहीं कह सकता हूँ
तुम्हीं बता तो हकीकत
फिर भी न मालूम क्यों
बिलकुल आश्वस्त भी हूँ

Monday, November 5, 2012

ग़लतफ़हमी/ misunderstanding

मेरा शौक राह चलतों से पहचान बना लेना
तुम मुझे अपनी पहचान यूँ ही बता मत देना
तुम कहीं कोई ग़लतफ़हमी मत पाल लेना
मुझसे मिलने से पहले पता तो जान लेना
It's my hobby to make friends with passers by
You don't reveal identity to me just like that
Please don't be under any misunderstanding
Before meeting me up do ask for the address

Sunday, November 4, 2012

चेतावनी

आज हर नए अंदाज़ में नज़र आ रहे हो
लगता कोई पुरानी याद से उलझ रहे हो
आज बाखूब तारीफों के पुल बाँध रहे हो
लगता है तुम बहुत दूर की सोच रहे हो
मेरी हर बात पर तुम यूँ मुस्कुरा रहे हो
लगता है मुझे कोई चेतावनी दे रहे हो
तुम्हें लगा होगा अहसास नहीं मुझको
तभी कुछ दिल की दिल में छुपा रहे हो
मेरे यूँ इतने क़रीब जो अब आ रहे हो
शायद मुझसे कहीं बहुत दूर जा रहे हो

Thursday, November 1, 2012

million times!

चाहे लाख कोशिश कर लो चिलमन से मुंह छुपाने की
लेकिन ढूंढने वाले भी तो क़यामत की नज़र रखते हैं
नज़रें झुकेंगी जो की कोशिश हमसे आँख मिलाने की
हम तो चेहरे की रंगत से पहचानने का हुनर रखते हैं
Try a million times to hide behind the curtain
But those who can find have the great eyes too
Pupils will fall if you try facing me eye to eye
I have all the expertise of knowing through face

Tuesday, October 30, 2012

मदमस्त वसंत

पतझड़ होगा
आयेगा फिर वसंत
नई कोंपलें निकलेंगी
घर आँगन महकेगा
नव ऋतु में विहग चहकेंगे
विहाग के स्वर भी
मन मयूर रंग जायेंगे
राग भी वासंती
सब कुछ वासन्ती होगा
हेमंत के बाद आते
शिशिर की ओट से
आयेगा मदमस्त वसंत

Sunday, October 28, 2012

इन्सान ही

इससे बढ़कर और तमन्ना क्या
अमन और सुकून की बस्ती रहे
ज़हां आबाद हो और तरक्क़ी करे
मुल्क़ के साथ अवाम भी खुश रहे
बस वही तमन्ना आज भी तो है
कि बस सुकून सदा सलामत रहे
ज़िन्दगी तो चलती रहेगी हमेशा
कोई फर्क नहीं हम रहे या न रहे
चाहे कितना भी ऊपर उठ जाए
इन्सान बस इन्सान ही बना रहे

Thursday, October 25, 2012

Storm

इन दरख्तों से पूछो तो सही तुम
हवा में कैसा बदलाव आ गया है
सोचा था बहेगी वसंत की बयार
पर ये अज़ीब सा तूफ़ान आया है
Why don't you ask the trees
What change air has brought
We thought of wind of spring
Weird storm it has turned out

Wednesday, October 24, 2012

बिस्मरणीय

जीवन में बिस्मरणीय होते हैं पल
जब अकारण ही बिगड़ जाती है बात
अपने अंतःकरण में झाँकने पर भी
कुछ समझ नहीं पाया मैं कुछ बात
न जाने क्यों सहानुभूति हुई थी मुझे
अपने ही मन में और अपने ही साथ
सनसनाती सर्द हवाओं के थपेड़े भी
मुझे सामान्य से लगे थे बीती रात
विचलित सा कर गए थे दोनों मुझे
उनका आगोश भी और उनका साथ

Monday, October 22, 2012

Motive

तुम समझ ही न पाए मेरा मक़सद
मेरा आज़माना तो बस बहाना था
चाहत की दरिया की गहराई में छुपी
तेरी आज़माइश को पहचानना था
You were unable to find my reason
Trial of mine was mere pretension
Deep beneath the river of your liking
Just to understand motive underlying

Wednesday, October 17, 2012

Heaven/ ज़न्नत

सोचा था आब-ए-हयात पी आये हैं हम
वो महज़ एक पोखर का पानी निकला
सोचा था जायेंगे तो बस ज़न्नत में हम
ये रास्ता तो महज़ दोजख़ का निकला
I thought that I had drunk the nectar
But the water of a pond it turned out
I thought if at all I will go to the Heaven
But the way to Hell alone it turned out

Monday, October 15, 2012

Side-glance

तिरछी नज़रों से तुम यूँ न देखो मुझको
हमें भी कनखियों से साफ़ दिखाई देता है
रुखसार पे तेरे तिल हैं कितने कहाँ कहाँ
हमें वो भी सब साफ़ साफ़ दिखाई देता है
Stop looking at me from those side-glance
I can see all that for sure from my asquint
One your face where all are moles around
I can also see and count them all without fail

Sunday, October 14, 2012

अब भी मेरे साथ

जाने अनजाने आज भी बस वही बात है
ज़िन्दगी में वही जानी पहचानी बात है
उनसे बिछुड़े हुए अब ज़माना हो गया है
परछाई मगर उनकी अब भी मेरे साथ है
मत समझना तुम ये महज़ इत्तफ़ाक़ है
ये तो हमारी उनकी मोहब्बत की बात है
दूरियों में भी उनकी नज़दीकी ही साथ है
तसव्वुर सही फिर भी उन्हीं का हाथ है
उन्हें हो न हो हमें हमें हर लम्हा याद है
मेरी परछाई भी शायद उनके ही साथ है

हलफ़नामा

फिर तेरे ख्याल आते गए एक के बाद एक
इसे तेरी बेवफाई कहूँ या मेरा दीवानापन
तस्वीर में भी तेरी नज़रें हैं झुकी झुकी सी
इसे मैं नज़र का अंदाज़ कहूँ या नज़रंदाज़ी
तसव्वुर में छोड़ा अक्स जाते जाते अपना
इसे मजाक समझूँ या या अदा कातिलाना
मुझसे पूछा भी नहीं तूने कि वज़ह क्या थी
इसे शुबहा कहूँ या समझूँ मैं तेरा हलफ़नामा
आज भी हर एक से पूछा मेरा पता ठिकाना
इसे तेरी बेबसी कहूँ या तेरे ही दर्द का तराना

Saturday, October 13, 2012

गुस्ताख़ी

हमने हँसी हँसी में ही वो कह डाला था
तुम्हें लगा होगा कि ये बात संज़ीदा थी
तुमने बात को बढ़ा चढ़ा के समझा था
हमें लगा था वो एक छोटी सी बात थी
तुम दिल पर ले चले बिना खास वज़ह
ये तो बस एक छोटी सी तकरार सी थी
शायद तुम भी अपनी जगह ठीक ही थे
अब ये लगा हमने क्या गुस्ताख़ी की थी

लत


सवाल ज़ेहन में था क्या यही मोहब्बत है
कोई कहता ज़ियारत तो कोई इबादत है
किसी ने समझाया ये मीठी सी शरारत है
एक शख्स ने कहा इज़हार ए शराफ़त है
हमारे लिए अपनी दोस्ती ही मोहब्बत है
शायद यही हमारी पट और यही चित है
आपसे की है दोस्ती ये हमारी क़िस्मत है
लगता है आज भी बहुत कुछ सलामत है
अब यही मोहब्बत और यही हकीकत है
हमें तो बस आपकी दोस्ती की ही लत है

Tones

अब कहाँ वो पाज़ेब की छन छन
खो गई कहीं चूड़ियों की खन खन
अब तो उनके आने खबर लाती है
बस सिर्फ एक मोबाइल की धुन
Lost are the melodious sounds of anklets
Forgotten are musical sounds of bangles
Now we get to know the news of arrivals
Only through sound of their mobile tones

Friday, October 12, 2012

Invite

कभी दूर से ही सही पैगाम तो कोई आएंगे
दिल की क्या कहें कौन भला रंज़िशें मिटा दे
दूरियों का क्या परवाज़ किस काम आएंगे
पर दिलों के फ़ासले भला कोई कैसे मिटा दे
May be some day from far off invitations will arrive
But in matters of heart who will erase the vengeance
Distances will sure be shortened by using the wings
But who on Earth will remove the distances in hearts!

So many

उन्हें मिलीं हर शख्स में कमजोरियां इतनी
जाने कहाँ से ढूंढ़ लाते हैं निकाल कर कितनी
किसी और की क्यों कर है तुम्हें परवाह इतनी
खुद में भी तो ज़रा झांक लो हैं कमियां कितनी
S/he finds weaknesses in all people so many
I don't know from where found each and any
Why care so much about the others and many
Peep in to yourself find them all over so many

Wednesday, October 10, 2012

सरमायेदार/ capitalists

एक तुम ही नहीं अकेले मेरा यक़ीन मानो
और भी कई सरमायेदार बैठे वक़्त के यहाँ
बचकाना हैं हरक़तें सारी तुम चाहे न मानो
हमेशा एक से दोस्ती की नहीं वक़्त ने यहाँ
Believe me that you are not the only one
Many other capitalists of time are around
Childish are your ways you accept or not
Time seldom made anyone permanent friend

Tuesday, October 9, 2012

ऐसा कोई

हर दर पे ढूंढा दोस्त पर ऐसा कोई मिलता नहीं
न कोई क़द्रदान मिला और है कोई आशना नहीं
हम यहाँ कोई उम्मीद से उनको देखा किए नहीं
फिर भी ये दिल ही तो है थामा मगर थमता नहीं
ये हसरतें मोम की तरह धीरे धीरे पिघलती रहीं
फिर भी किसी और का जहाँ रोशन करती रहीं
कोई जाँबाज़ किसी और की दास्ताँ सुनता नहीं
अपनी ही खातिर कभी कोई यूँ ही जाँ देता नहीं
है कोई इधर अपना नहीं पर ग़ैर भी तो कोई नहीं
हम से ही अब हैं हमारी हसरतें शिक़वा कर रहीं

Monday, October 8, 2012

Bitterness

फिर उसी तल्ख़ी से कर लो कोशिश
हज़ार बार तुम हमसे बात करने की
हर वार ख़ाली कर देंगे तुम्हारा हम
सिर्फ़ अपनी मुस्कराहट के चलते ही
Again with the same bitterness
Try thousand times talking to me
All assaults of you will go waste
Just with the very own smile of me

Doubt

अपना हक़ अदा करने का सबको हक़ है
पर उनकी नीयत पर ही हमें कुछ शक़ है
Each one has the right to work on the right
But here we have the doubt about the intent

किसने कहा?

बेवफ़ाई में भी कब थी इतनी ताक़त
जो हमारे हौसलों को जरा हिला सके
हम तो मोहब्बत की राह पर चलेंगे
किसने कहा हम मंज़िल न पा सके

Credence


I don’t lend credence to whatever I say
I had never wanted to make words prey
My utterances might sound bitter sway
But I can’t serve you only husk and hay
You may doubt my indulgence your way
I don’t want you to accept all what I say
My intention is to show you the best way
As I know them sincerely in my own way
You may disagree or agree with anyway
For your sake you need something to say

Sunday, October 7, 2012

Chameleon

वक़्त बदलते ही तुम गिरगिट की तरह रंग बदल गए
हम तुम्हारी फितरत और औकात दोनों पहचान गए
With the change of times like Chameleon you changed colors
I have now understood both the ways and real colors of yours

Thursday, October 4, 2012

Improvement


I had always ignored your weakness
I know what all the weaknesses are
Then you had chosen to ignore me
I had thought that’s the way you are
I had chosen to support you always
You thought that the way people are
I never bothered to know the ways
Of why you were like what you are
I just wanted myself to get carry on
Without trying to know who we are
You faltered but never in my opinion
Knowing well that you are human too
Trying to be better than what you are

Wednesday, October 3, 2012

कब तक/ Limit

रोज़ नए वादों के नारों के चलते पलते
नए नए लोग कहाँ ले जायेंगे मुल्क को
अब इस क़दर मूर्ख बनायेंगे कब तक
लोग ही आखिर कब तक लोगों ही को
Always prospering by assurances and raising new slogans
Newbie people will take the country to around up to where
What is the limit of this way select people will fool others
For how long can the people to their own people themselves

Monday, October 1, 2012

नर हो न निराश करो मन को - मैथिली शरण गुप्त

कुछ काम करो कुछ काम करो
जग में रह के निज नाम करो।

यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो!
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो।
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो न निराश करो मन को।

सँभलो कि सुयोग न जाए चला
कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला!
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना।
अखिलेश्वर है अवलम्बन को
नर हो न निराश करो मन को।।

जब प्राप्त तुम्हें सब तत्त्व यहाँ
फिर जा सकता वह सत्त्व कहाँ!
तुम स्वत्त्व सुधा रस पान करो
उठ के अमरत्व विधान करो।
दवरूप रहो भव कानन को
नर हो न निराश करो मन को।।

निज गौरव का नित ज्ञान रहे
हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे।
सब जाय अभी पर मान रहे
मरणोत्तर गुंजित गान रहे।
कुछ हो न तजो निज साधन को
नर हो न निराश करो मन को।।

- मैथिली शरण गुप्त

Saturday, September 29, 2012

Stop Criticizing Politicians and Governments; Start Becoming Change Agents

Blaming the governments and the politicians has become a popular fashion among people all over the World!


Who are the members of the legislative bodies? They rightly claim to be our representative; because we have elected them to be so.

What is politics? It is the umbrella under which groups of people with different ambitions and agenda keep planning to be at the helm of affairs; by convincing/luring the supporters to get a majority view in their favor!

Now what is left to blame? Certainly we the people of any country! Knowingly or unknowingly we elect parties and people to govern us. So stop bitching about the politics, politicians and the governments!

Are you ready to become the change agent? Do your bit!

What we can do the least is to practice what we want to preach others to do! Everyone must analyse his/her role in the society, nation; and global systems. You are not a drop in the ocean; but the ocean is made from the drops. In your own way, means and aptitude do good and feel happy about. You are the master of your fate, ethics, behavior and deeds! If majority of people start doing their job sincerely and with commitment, the society in the next 10 years will become so different and likable!


Amen!

अपनी ज़ुबां / own tongue

खामोश निगाहें हैं खामोश ज़ुबां है
फिर भी मोहब्बत के ये तार रवाँ हैं
सन्नाटा नहीं है बस खामोशियाँ हैं
खामोशियों की भी अपनी ज़ुबां हैं
Silent are the sights and the tongue
Yet beaming are the chords of love
Not the silence but just silent ways
Silence too have their own tongue

Friday, September 28, 2012

बिसात

तुम्हारे अल्फाज़ जब नापसंद किये हमने
कोई शिक़ायत न कभी शिकवा किया हमने
हँसते हँसते सहे तुम्हारे सब वार थे हमने
न जाने कितनी नसीहतें हर रोज़ दी हमने
सोच बदलेगा ये तुम्हारा मिजाज़ था हमने
बहुत बर्दाश्त किया तुम्हारे दाँव को हमने
रोज़ नज़रंदाज़ कर किया माफ़ था हमने
लो बिछा दी है ज़िन्दगी की बिसात हमने
अब दो चार हाथ खेलने की ठान ली हमने

महके महके ख्वाब/ Fragrance of Dreams

महके महके से ये ख्वाब मुझे
आज भी देते जाते हैं तसल्ली
खुशियाँ भी दे जाती हैं दस्तक
अक्सर आकर यहाँ मेरी गली
Fresh fragrance of the dreams
Provide reassurance even now
Happiness knocks at my doors
Visiting me every then and now

Thursday, September 27, 2012

Don't Know/ नहीं मालूम

वक़्त से अलग होकर जुदा हो गए वक़्त से हम
फिर भी बहुत खुश हैं अपने आशियाने में हम
हमें नहीं मालूम कि होती है यहाँ क़िस्मत क्या
अपनी क़िस्मत को रोज़ ये राज़ बताते हैं हम
Separated from times I am away from time
Yet very happy I am in my own li'l dwelling
I don't know what is the big deal about luck
Everyday I reveal the secret to my fortune

Tuesday, September 25, 2012

अथाह / Unpredictable

जाने क्यों इतना चंचल व अथाह होता है मन
क्या मालूम हर पल में कब जाने कहाँ ले जाये
आसमान में छाए बादलों सा आवारा है ये मन
कभी तो जम के बरसे कभी इक बूंद को तरसाए
Don't know why so fickle and unpredictable is mind
One never knows at which moment it will take where
It's like a moving clouds spread in the sky around
Rains heavy yet make guessing for drops somewhere!

Sunday, September 23, 2012

Burden on Earth


Those who always shopping from
Single or the multi-brand shops
As the champions of the masses
Taking up issues and now giving
Sermons on foreign investments
The always unethical and corrupt
People and also their institutions
As the champions of transparency
Profoundly opposing movements
Busy finding mole from mountains
Uncivil people like burden on Earth
Merely for their ulterior motives
Undermine the role of civil society
The people never lived in villages
Out to thwart the development
Swearing by the plight of villagers
The parties with dictatorial trend
Try moving the attention away
Chanting chores of democracy
Whenever India strides ahead
Competitive and globally powerful
Why do such people do get crazy?

बेअसर / Ineffective

सब बेअसर ही हुआ मेरा कहना
अब कहने को बचा भी कुछ नहीं
वो कहते थे मेरे हित की करेंगे
पर मेरा पता तक भी पूछा नहीं
My suggestions proved ineffective
Now nothing with me is left to say
They promised work for my welfare
But seldom ask for even my address!

Saturday, September 22, 2012

अन्ततोगत्वा

व्यक्ति की बुनियादी आवश्यकता है
रहने को घर चन्द चाहने वाले लोग
दो वक़्त की रोटी और चैन की नींद
आकांक्षाएं फिर आगे बढ़ने लगती हैं
पहले धन-धान्य फिर कुछ सम्मान
फिर नाम उसके बाद यश प्राप्ति भी
समझदार यहाँ सिंहावलोकन कर
समाज को वापस भी करने लगते हैं
आत्मसम्मान से लबरेज़ जीवन में
उनकी प्रशस्ति नए आयाम दिखाती
मूर्खों की पिपाशा और बढ़ती जाती है
अनैतिक कार्य और अनैतिक धन
उनका अपना मार्ग ही बन जाता है
किन्तु सब कुछ एक क्रम सा भी है
मूर्ख बस चिंता और असुरक्षा पाते हैं
लोगों में ईर्ष्या के पात्र बन जाते हैं
अपने कर्मफल स्वरुप ही उनका
जीवन भी कष्टकर होता ही जाता हैं
रोगग्रस्त हो जब उन्हें अहसास हो
समय चक्र में बस देर हो जाती है
पश्चाताप हेतु अवसर नहीं मिलता
एकाकी जीवन में क्षोभ ही बस!
अन्ततोगत्वा सब कुछ यहीं रहेगा
धन, लाभ, प्रेम आदि सब कुछ ही
सम्मान और यश ही याद रहता है

हमारा


कल हमारा न था सच है
पर आज है अवश्य हमारा
किसी की अकर्मण्यता से
सिमटा सा है आज हमारा
पर आज अब हमारी बारी है
तभी तो होगा कल हमारा
या फिर किसी और के लिए
होगा हर एक प्रयास हमारा
व्यक्ति और व्यवस्था को छोड़
सोचेंगे क्या है कर्तव्य हमारा
वर्ना कोसने और आलोचना का
है ही क्या अधिकार हमारा ?

Friday, September 21, 2012

Fallacy of Perception

At times you repeat
What you hear from others
Without having to verify
Ignoring the prejudices
And intentions of others
You try spreading it as truth
Perceiving it to be true
May be with good intent
But without realizing
Actually this being
A fallacy of perception!

Thursday, September 20, 2012

एकतरफा

मेरे वह सारे ही सतत प्रयास
तुम्हारे ही लिए किये गए थे
इसके प्रतिफल में तुमने बस
इसे मेरा कर्तव्य मात्र समझा
और अब जब तुम्हारी बारी थी
तुम मुझे ही नज़रंदाज़ कर गए
वह भी तब जब फिर मैंने चाहा
तुम्हारा सिर्फ तुम्हारा ही भला
मुझे ज्ञात हो गया है सदैव को
तुम में और मुझ में का अन्तर
मेरे प्रयास जारी रहेंगे अब भी
मेरी और से एकतरफा ही सही
अब मैं पूर्ण रूप से सहमत हूँ
नेकी कर और दरिया में डाल

Wednesday, September 19, 2012

छत्रछाया

हँसते खेलते कब बड़े हो गए
कल की ही बात प्रतीत होना
ज़िम्मेदारी का अहसास भी था
उनकी छत्रछाया का ताना बाना
कभी लगा नहीं था एक दिन
पड़ेगा हमें ये भी दिन देखना
एक खालीपन अब हमेशा को
कितना मुश्किल भूल पाना
पिता के संसार से जाते ही
ढह गया था मेरा आशियाना
एक रेत के घरोंदे की तरह
कई दशकों से जो था पहचाना
पर अब भी मौजूद है सब
यादों में जो है आना जाना
बड़ा रहस्यमय है ये संसार
असम्भव है यहाँ थाह पाना
एक एक कर औरों का तो
फिर अपना भी चले जाना
सच है यहाँ की यही रीत है
कि बस लगा है आना जाना

Tuesday, September 18, 2012

क़शिश/attraction

तेरा नामोनिशां तक मालूम नहीं मुझको
तेरी हर बात की महक आज भी बाकी है
हर याद धुंधला चुकी है उम्र के साथ अब
मगर एक क़शिश सी आज भी बाकी है
I have no clue of your whereabouts now
Fragrance of everything of you is around
The reminiscences are hazy with the time
Yet the very attraction is still all around

Lest

तुम अपनी ख़ुशियों को मत नज़रंदाज़ करो
बेवक्त वरना कहीं ख़ुशी ही तुमसे रूठ जायेगी
ज़रा आहिस्ता अपने ग़म का ख़ुलासा करो
वरना तमाशाइयों की बड़ी भीड़ जुट जाएगी
Don't try to ignore your happiness
Lest the happiness may dislike you
Reveal your sadness with a whisper
Lest crowds will find fun around you

Dreamz

हक़ीक़तों से कुछ अलग रहते ही
हर शह बस रूमानी लगने लगी
जागते ख़्वाब देखते देखते यहाँ
ज़िन्दगी ख़्वाब सी लगने लगी
Staying away from the realities
Every moment sounds romantic
And dreaming while I am awake
Life looks like a very sweet dream

Monday, September 17, 2012

Appreciate


I know I block sunshine for you
With a deep sigh said the rain
Yet I know that you appreciate
Me cooling the wrath of the sun
I know surrounding gets messy
I also am the cause for greenery
You see me reducing the lights
But I bring back light in your lives
Sometimes I may sure pour heavy
But I do have my ways of savory
My existence is not so delicate
I do hope you all can appreciate

Sunday, September 16, 2012

Decision of Life

बस चन्द अल्फाज़ कहने की बात थी
कोशिश की, मैं कहते कहते रह गया
ज़ुबां तक आए लफ्ज़ मैं निगल गया
मेरा उम्र भर का फ़ैसला ही बदल गया
It was only a matter of uttering few words
I tried but it became hard to bring them out
Just about to say but I swallowed the words
Changing decision of life it had turned about

अकथनीय/Unmentionable

ख़ामोशी में बसे हैं मेरे
कुछ अकथनीय सत्य
मानो मैं झुठलाता सा वो
समस्त कथ्य और श्रव्य
स्वतः अवलोकित तथ्य
कई बात तो कह से डाले
पूर्ण नहीं पर अर्धसत्य
जो थे मेरी ही दृष्टि में
तर्क किंचित अकाट्य
और संभवतः ध्रुव सत्य
In my lurking silence are
Few unmentionable truths
As if I had disbelieved
The spoken and the heard
Facts observed by myself
At times I had revealed
Though the partial truths
Those in my own judgement
Reason indisputable though
And perhaps speaking truths!


Saturday, September 15, 2012

बस यूँ / Like This

हमेशा कोई हसरत कहीं रह जाती हैं बाक़ी
कभी समन्दर कभी हिमालय की चाहत में
बस यूँ बसर होती है ज़िन्दगी यहाँ सब की
कभी वो मयखाना तो कभी हसरत ए साक़ी
Always some desires remain wanting
At times oceans some times Himalayas
Everyone spends the life like this around
At times the bar at times the bartender!

फुर्सत/ Free Moments

कभी तो फुर्सतों के दौर में सोचा था
हम भी जमकर लुत्फ़ आजमायेंगे
हर फुर्सत के लम्हे में बेफुर्सती पाई
न जाने फुर्सत के दिन कब आयेंगे
Sometimes in those my free moments
Thought I shall also enjoy thoroughly
But,each free moment proved busy too
Don't know will arrive my free moments

Friday, September 14, 2012

शातिर/ Clever

बहुत शातिर समझते थे वो ख़ुद को
सोचते थे ज़माना तो बस उन्हीं का है
अब जो हमारी गली आए तो समझे
शातिर होना सिर्फ अपनी ही जगह है
So clever he thought of himself
As if whole World he only owned
Now that he had to come around
Knows clever too have limitations

Wednesday, September 12, 2012

फैसले


जब भी फैसले को करता है ये मन
कई नये सिलसिले आने लगते हैं
कभी कुछ नये वाक़ये और कभी
चन्द नये सवाल पास आने लगते हैं
मालूम होता है कि बहुत दूर है अभी
फैसले सब्ज़- स्याह दिखाई देते हैं
जाने कब आयेगी फैसले की घड़ी
कुछ ऐसे ही ख़याल आने लगते हैं
कभी ज़ेहन में अज़ीब से ख़यालात
अपने आप बीच में आने लगते हैं

Monday, September 10, 2012

कभी कभी

बादलों और बारिश के बीच
खुली धूप चाहे गर्म ही सही
कभी कभी अच्छी लगती है
ग़मगीन माहौल में भी कभी
किसी की खिलखिलाती हँसी
कभी कभी अच्छी लगती है
मक़बूल ज़िन्दगी के बीच भी
बेवक्त ही आ गई परेशानी भी
कभी कभी अच्छी लगती है
संजीदा चलती बहस के बीच
बचकाना बेवकूफ़ी की बात
कभी कभी अच्छी लगती है
साथ रहने की आदत के बीच
जुदाई की थोड़ी सी ये आदत
कभी कभी अच्छी लगती है

Sunday, September 9, 2012

तसल्ली को तसल्ली


गुज़ारिश तो बड़ी की थी मैंने भी यहाँ
जो क़िस्मत में नहीं उसका गम कैसा
है बड़ी उम्मीद अब भी मुझको ख़ुद से
हूँ अकेला ही मैं बस यहाँ मुझ जैसा
अकेलापन मुझ पर हावी नहीं न कभी
हवा का हर झोंका है मेरा पहचाना सा
इंतजार के इन लम्बे पलों में मानो
हर एक ज़र्रा है मुझे तस्सली देता सा
कभी तक़दीर कभी तदवीर के सवाल
बड़ी तसल्ली से मैं हर ज़वाब देता सा
मेरे हिस्से में जो भी आया वही मेरा
तसल्ली को भी मैं तसल्ली देता सा

Why on Earth?

Everyone knows that the 'origin of species' story. That doesn't mean that we all start behaving and acting like monkeys!

Everyone seeks peace, brotherhood, humanity in his/her own ways; yet, the aberrations that come in due to individual and group prejudices make sure the intent of the people is subverted by bringing in factors that are weird and self-seeking ones. The reasoning gets distorted, the ration gets defeated and the whole logic of being human start getting rotten.

The bullying by people, communities and nations; the use of force and violence; resorting to inhuman behavior; terrorism; and more are the manifestation of this false sense of taking steps for equity, justice and egalitarian society.

Imperfections are the cornerstone of evolution and improvements and they will always remain. Except for few circumstances, one has to live with and adjust with the imperfections around. What is perfect is itself a matter of opinion anyways; and opinions are never perfect too!

So why one Earth can't we all recognize and live with imperfections; as long as it is not a matter of 'life'. I do not mention death on purpose; as that's a perfect thing and bound to happen anyway!

Saturday, September 8, 2012

बेपर्दा/ Uncovered

एक पर्दा हटाने से शुरू
एक के बाद एक परदे
ख़ुद ब ख़ुद हटते ही गए
ख़ुद से क्या शर्म करते
पर औरों की नज़र में
वे बेपर्दा होते चले गए
Started with removal of one mask
The masks after mask of theirs
Started getting uncovered since
Though not ashamed by themselves
Before the eyes of everyone else
Their deeds continued uncovering

Friday, September 7, 2012

हवा का झोंका

कर सकते महसूस मुझे तुम
हाथ मगर आऊं न कभी मैं
आज यहाँ कल नई दिशा मैं
महकता हवा का झोंका हूँ मैं
पास बुलाओ या न बुलाओ तुम
अपनी मन मर्ज़ी से आऊंगा मैं
सन-सन कर गीत सुनाऊंगा मैं
एक तेज हवा का झोंका हूँ मैं
मैं न कभी किसी एक शख्स का
दुनियाँ भर सबका साथी हूँ मैं
प्रेम ही प्रेम जगाता सब में
मदमस्त हवा का झोंका हूँ मैं

Thursday, September 6, 2012

passing cloud/ विचरता बादल

एक विचरता प्यासा बादल सा हूँ मैं
मैं क्या प्यास बुझाऊंगा समन्दर की
उम्मीद जो उसको है मुझ को भी है
पर मालूम है मुझे सब बात अन्दर की
Just a dry passing cloud that I am
How will I quench the thirst of sea
Though I'm aware of inside story
Yet I do have the same hope as sea

Life After Death

नहीं गम कि कहाँ भटकाएगी ज़िन्दगी
जिंदादिली से जियेंगे हम सदा ज़िन्दगी
जब तक है दम ज़िन्दगी होगी अज़ीज़
दम ही निक़ल गया तो कैसी ज़िन्दगी
I don't care where all life will take
I shall always live with enthusiasm
Until I'm alive I will cherish my life
After death what and whither life!

Wednesday, September 5, 2012

फिर पास

जीवन के बंधन, फिर पास आने लगे
रिश्तों की खुशियाँ; फिर गुनगुनाने लगीं
मौसम की रिमझिम, फिर रूमानी लगे

आओ आज फिर से, मेरे आगोश में
बरसाओ प्यार के रंग, फिर मेरे संग
बस भूल जाओ, वो सब पुराने प्रसंग
जीवन की कलियाँ, फिर खिलने लगीं
खुशियों के वो पल, फिर पास आने लगे
जीवन के बंधन, फिर पास आने लगे

फिर कहीं कोई है, वो इक तारा टूटा
माँग लो मेरे लिए फिर, था जो सफ़र छूटा
वक़्त ने था मेरा जो, सब कुछ था लूटा
हाँ मुझे अज़ीज़ है, हर सुबह नई यहाँ
सुबह के होते ही, सब अँधेरे जाने लगे
जीवन के बंधन, फिर पास आने लगे

Message of Soul/रूहानी

तेरे आने की मुझ को ख़बर तक न हुई
फिर भी न जाने क्यों ये नज़रें टिकी रही
हुआ होगा रूहानी कोई अहसास मुझे बस
तभी तो तेरी पहुँचत की वजह थी ये रही
I sure had no clue of your arrival
Yet they eyes were static on path
I must have had message of soul
It became reason of your arrival

Tuesday, September 4, 2012

ज़मीन-आसमान Earth-Sky

फ़िरोज़ी फ़लक ने बताया मुझे अचानक
मेरी ओर देख किसी को कुछ नहीं मिला है
ख़्वाब भी यहाँ कभी बेवजह नहीं आते हैं
ज़मीन को ओर देखो यहीं से सब मिला है
दिन के आसमान में रंग ज़रूर बदलते हैं
अँधेरी रात में तारों के सिवा क्या मिला है
ज़मीन के साथ दरिया और समन्दर भी हैं
और देखिए समन्दर का रंग भी तो नीला है
मुझे जो भी मिला सब कुछ यहीं से मिला है
आसमाँ से दूरियों के सिवा किसे क्या मिला है

Blue sky tried to counsel and said to me
Looking at me no one has achieved anything
Dreams too don't arrive without any reason
Look at the Earth everything is found here
Daytime skies do exhibit the changing colors
In dark nights who anything but stars around
With the Earth are the rivers and oceans too
And see oceans are also showing the blue color
Whatever we found is everything from here alone
Skies have never given us anything but distances

Monday, September 3, 2012

Random

मेरी चाहतों का सिलसिला थम सा गया
तुम याद आए मेरे चेहरे पर नूर आ गया
My wanting's displaying sudden pause
With you in visualization my face glows

तेरे आने के साथ ही न जाने क्या क्या आ गया
मुझे मालूम नहीं कहाँ से ये सब कुछ आ गया
With your arrival came so many thing around
Don't know from where all these have arrived

मेरे ही हित की बात सदा कहते
मेरी ही तुम व्यथा कथा दोहराते
अब हम भी समझ गए हैं शायद
तुम ख़ुद को ही मुझ में हो देखते
You have been talking of my welfare
Always narrating the my woes in life
Now perhaps I have understood you
In 'me' you peep in to your interests

मेरी इन हसरतों का क्या
ये तो बस बढ़ती जाती हैं
कहीं कोई मिले न मिले
ज़िन्दगी चलती जाती है
Noting new about desires
They would keep growing
Come what of achieving
Life always keeps moving

जब बरसना ही था उसको
बरसने का नाम नहीं था
अब मगर जमके बरसी है
रोज़ ये बेमौसम बरसात
शायद अब यही लगता है
मौसम हो गया दीवाना

सुन ली है नसीहत मैंने तुम्हारी
लेकिन हर ओर ही मुद्दे बहुत हैं
तुम अकेले नहीं मेरे खैरख्वाह
मेरी बस्ती में मेहरबाँ बहुत हैं
I did listen to your advise
But there are issues too many
You aren't my lone well wisher
Around me are benevolent many

लगा था कितनी ख़ुसूसियत मुझ में
ज़मीं से उड़कर आसमाँ बन गया हूँ
किसी मेहरबाँ की इनायत से अब मैं
बस एक भूली सी दास्ताँ बन गया हूँ
I wondered that I was special
Away from ground I was a sky
Thanks to someone favoring me
I've become just a forgotten story

बस पत्थरों के से हो चुके इंसानों में यहाँ
कहीं कोई आह सी निकलती है अब भी
बुत बनकर देखने वालों में भी यहाँ शायद
बाकी है उम्मीद की कोई किरण अब भी
Stone like people around us, yet
The demonstrate a rare deep sigh
Stone turned people also it means
Have still been left with a ray of hope

उसी दिल में झाँकना चाहा था मैंने
जहाँ मेरा कोई नामो निशाँ नहीं था
फिर भी दिल लगा ही लिया था मैंने
इस पर मेरा कोई जोर भी नहीं था
I wanted to peep in the same heart
Where there was no traces of mine
Yet I was in love with the same one
Since I never had any will to overrule

बात आखिर आपकी अब मान ली है मैंने
उम्र भर का खामियाजा चुका दिया हमने
Finally I have decided to accept your prescription
Thus I have now compensated for whole my life!

Sunday, September 2, 2012

इल्तज़ा/impetration

उल्फ़त के मायने मुझे नहीं मालूम
मुझे बस अपनी उल्फ़त का सिला है
अपने महबूब का पता नहीं मालूम
मुझे तो बस मोहब्बत की इल्तज़ा है
I don't know the meanings of love
I am just concerned with my love
I've no any clue about my beloved
Just impetration of my lovingness

फ़ख्र / proud

किसी एक गैर की खातिर हमने
अपना जी जान सब लुटा दिया
फिर भी हमें फ़ख्र है इस बात का
अपनी फ़ितरत का पता बता दिया
Just To favor one stranger
I put my everything at stake
Yet I feel very proud about
That I made my nature known ~Udaya

खेद

हम हमारे परिवार में ख़ुश थे
अब भान अपने परिवार का
मनों में मेल इतना नहीं था
अब बोझा ढोते मनों मेल का
सिर्फ अपने ही सुख से नहीं
औरों के सुख से भी ख़ुश होते
अन्तर इतना अधिक न था
अपने परायों कि संख्या का
इतना भी मुश्किल न था
नज़दीकी महसूस कर लेना
बड़ी आसानी से हम लोग
बना लेते थे रिश्ता मन का
सर्द होते चले मौसम का
हमें इतना अहसास नहीं
जितना कि खेद है अब हमें
सर्द होते हुए सब रिश्तों का

Friday, August 31, 2012

Hindsight

Completed 32 years and five months service; of which 30 years completed today in the Indian Civil Accounts Service. Time flies and gets past so fast...as if it bean yesterday! But yes; I still have the sensitivities and enthusiasm of a teenager;)

The journey of my professional life has taken me in various positions in India and abroad; and I have enjoyed every bit of it and always tried to give more than 100%. To me the ethics, principles, systems and benevolence are most important virtues in our persona, social; and professional lives.I value the efforts of the people who try hard to bring smiles in the faces of unknown people also.

My logical thinking and sensitivities of the poet in me have always helped me retain my enthusiasm for learning and empathizing with the people around me.I don't recall moments when I stayed away from my duties; in preference to my personal reasons. Yes I do have other passions like social work, writings, poetry, music, philosophy and many more..on the sidelines.

Thanks everyone for being around me and helping me retain faith in the people, systems and myself!

Wednesday, August 29, 2012

सही

बस मेरी ख़ातिर न सही
अपनी ख़ातिर ही सही
किसी गैर के लिए सही
चन्द अल्फाज़ ही सही
कुछ तुम कहो तो सही
सच न भी हो तो न सही
बात बढ़ाने को ही सही
पैगाम कोई न हो सही
सिर्फ़ बातचीत को सही
माहौल बनाओ तो सही
हमारे लिए गुफ़्तगू सही
बात कुछ बढ़े तो सही

Tuesday, August 28, 2012

Our Own/अपने

हमने खुद चुना है रास्ता अपना
इसके काँटे भी तो हमारे अपने हैं
फूल के रंग बेशक रंगीन हों सही
बेरंग काँटों के सबक़ भी अपने हैं
We have chosen our own paths
Difficulties faced are also we own
The colorful flowers may be nice
Lessons from thorns too our own

आज भी

गर्त में ढके
छुपे अरमानों को
इन्तज़ार है बस
तेज़ हवा के झोंके का
सर्द हो गए
इन हौसलों को
इन्तज़ार है अब
एक गर्म हवा का
सुगबुगा रहे
'बागी' तेवरों को
इन्तज़ार है सिर्फ
एक नई दिशा का
मेरी बाक़ी उम्मीद को
इन्तज़ार है आज भी
इसी व्यवस्था में
एक ईमानदार नेता का!

Friday, August 24, 2012

Who You Are/तुम कौन

भूल जाना चाहता हूँ
सब कुछ यहाँ
बस तुम्हारी मोहब्बत
और मेरा इम्तहाँ
वैसे भी कुछ याद नहीं
तुम कौन और मैं कहाँ

I want to forget
Everything around
But just your love
And my own test
Anyways I don't know
Who you are
And Where I am!

Thursday, August 23, 2012

समाधान

उत्तर तो दे चुका
किन्तु ये एक
अजीब दुविधा है
समझ नहीं पाया मैं
तुम्हारे ये प्रश्न
क्या मुझ से हैं
या फिर मुझ पर हैं
इस जिज्ञासा का
कौन करेगा समाधान
तुम अथवा मैं?
या फिर नए प्रश्न!

Wednesday, August 22, 2012

नई साँस


जाने क्यों पर शायद अब
आदत ये खास बनाती हैं
दूरियाँ मुझे भाने लगी हैं
मुझे मेरे पास ले आती हैं
मेरे करीब की दुनियाँ में
एक नई आस जगाती हैं
तुम्हारे होने का मीठा सा
मुझे अहसास कराती हैं
अक़सर हर अज़ीज़ को
ये दूरियाँ पास बुलाती हैं
मेरी अटकती साँसों में
एक नई साँस ले आती हैं

Monday, August 20, 2012

पुराना इश्तहार

हर बार सोचा एक बार मौका देंगे
बार बार हमारी नज़र में गिरे तुम
हम चुप रहे बढ़ी हिम्मत तुम्हारी
फिर भी हमीं को कोस रहे हो तुम
तुम्हें मुगालता अगर कुछ भी हो
अपनी ही साँस से चल रहे हो तुम
तुम जितने भी चाहे ठोंक लो ताल
मेरी नज़र में ख़त्म हो रहे हो तुम
देख ली ज़माने ने कूबत तुम्हारी
अब कभी यूँ बहला न सकोगे तुम
किसी न बिकने वाली चीज का
पुराना इश्तहार बन गए हो तुम

Saturday, August 18, 2012

भरोसा

अब तो तुम्हारी तारीफ़ में
कुछ भी कहने का मन नहीं
जो भी मैं कहना चाहता था
मेरे पास उसके शब्द नहीं
कहा कई लोगों ने मुझसे
इतना ऐतबार ठीक नहीं
पर मुझे तो तुम में कभी
खोट भी नज़र आया नहीं
अब लगा ज़माना सही था
मैं ही पहचान पाया नहीं
मुझे फिर भी फ़ख्र रहेगा
जब था भरोसा तोड़ा नहीं

Thursday, August 16, 2012

'नीर-क्षीर विवेक

अब न बहला सकोगे शायद
झूठे वादे और नारों से मुझको
लोक लुभावन शब्द जाल में
बाँध सको न तुम अब मुझको
मुझसे ही मिलती ताक़त से
मेरे प्रतिनिधि बन छलते मुझको
मेरे हैं क्या क्या अधिकार यहाँ
भान हो चला है अब मुझको
मेरे हित में क्या कर्तव्य मेरा
सोच रहा मैं क्या करना मुझको
बिना लोभ लालच में चलकर
'नीर-क्षीर विवेक' बोध है मुझको

'क़त्ले आम

हर ओर निराशा क्यों है
क्यों बेबस सी है अवाम
क्यों हर दर्द छुपाए बैठी
सीने में बन अनजान
बदलने होंगे अब शायद
प्रगति के कुछ आयाम
जीवन के नैतिक मूल्य
लौटाने होंगे फिर हर धाम
शोषक व भ्रष्ट जनों को
चुकाना होगा हर दाम
निर्धन के धन से बने धनी
दें हिसाब बन बिन बेलगाम
जन प्रतिनिधि जन में से हों
हों न कभी भी जो हैं बदनाम
अपराध लूट हत्या से इतर
हर बुराई का हो 'क़त्ले आम'
मुस्कुराते जीवन पल ज़रूरी
हो कोशिश हर खास-ओ-आम

Wednesday, August 15, 2012

बशर्ते/Albeit

कोई और करे न करे
हमें ख़ुद करना होगा
हमें अपनी ही खातिर
नजरिया बदलना होगा
कल भी हमारा ही था
कल भी हमारा होगा
बशर्ते कल की बात को
हमें आज सोचना होगा
किसी की तरफ नहीं
अपनी और देखना होगा
आज ज़रूर हमारा है
सपनों को संवारना होगा
सिर्फ देखना नाकाफ़ी होगा
Whether others do or not
We have to start cracking
At least for our own sake
We must change our attitude
Yesterday was ours for sure
Tomorrow shall be ours too
Albeit the dreams of tomorrow
We have to work on today
Instead of looking at others
We need to believe in ourselves
Today is definitely ours to do it
Plan to ensure dreams materialize
Just living in them is inadequate!

Liberation


Liberation is the motive and crux
That independence resurrects
Yet the very feeling of liberation
Does elude people of all nations
New group of the changed hawks
New campaigners around beacon
In search of replacing the old ones
Luring people with catchy slogans
Trying all possible ways and means
Exploring and seeking all benefits
The self-seekers of new nations
Without hesitation and inhibitions
Ready to sell their own nations
Just to secure their self-interests
Leaving common people guessing
Whither independence, liberation!

Tuesday, August 14, 2012

मूल्यांकन

तिनका तिनका जुटा
पक्षी के घोंसले ज्यों
एक दिन उजाड़ होते
इंसानों की फितरत भी
कुछ इसी तरह गुजरती
सब जोड़ तोड़ हासिल
ज़मीन का एक टुकड़ा
ईंटों का बना मकान
आसपास ईर्ष्यालु लोग
एकाकी वृद्धावस्था के पल
भविष्य में गुजरे वर्तमान
विगत की सोचते वर्तमान
अपनों से विलग विमुख
अंतर्मुखी एकांत के पल
विवशता के आयाम मापते
जीवन के मूल्यांकन

Monday, August 13, 2012

Questions!

कितने प्रश्न करोगे अब
मैं सहज ज़वाब दे चुका
तुम्हारे प्रश्नों के
मुझे अब भय होता है
तुम्हारे नए प्रश्नों से
हर प्रश्न से उत्पन्न होता
अक्सर एक नया प्रश्न
हर ज़वाब भी प्रायः
खड़ा करता नया प्रश्न
मौन भी विकल्प नहीं
वह तो और प्रश्न खड़े कर देगा

How many more questions?
I have replied to all
Your questions thus far
I am getting so scared now
With each of your new questions
Often new questions arise
Each of my replies too
Raises another question
Silence too is no alternative
As that can cause to get
Many new questions!

Friday, August 10, 2012

राजा कृष्ण

कृष्ण कृष्ण सुनते
कृष्ण दुविधा में थे
राधा को भूल अब वे
रुक्मणि की चिंता में थे
अब न कंस की चिंता
न जसोदा- नन्द का डर था
गोपियों को भूल अब
राजा की चिंता में थे
ग्वाल बाल भूल रहे थे कि
कान्हा अब राजा कृष्ण थे

Tuesday, August 7, 2012

Forgotten Story


लगा था कितनी ख़ुसूसियत मुझ में ज़मीं से उड़कर आसमाँ बन गया हूँ किसी मेहरबाँ की इनायत से अब मैं बस एक भूली सी दास्ताँ बन गया हूँ I wondered that I was special Away from ground I was a sky Thanks to someone favoring me I've become just a forgotten story

Monday, August 6, 2012

Issues

सुन ली है नसीहत मैंने तुम्हारी लेकिन हर ओर ही मुद्दे बहुत हैं तुम अकेले नहीं मेरे खैरख्वाह मेरी बस्ती में मेहरबाँ बहुत हैं I did listen to your advise But there are issues too many You aren't my lone well wisher Around me are benevolent many

Will

उसी दिल में झाँकना चाहा था मैंने जहाँ मेरा कोई नामो निशाँ नहीं था फिर भी दिल लगा ही लिया था मैंने इस पर मेरा कोई जोर भी नहीं था I wanted to peep in the same heart Where there was no traces of mine Yet I was in love with the same one Since I never had any will to overrule

Sunday, August 5, 2012

रवानी

लम्हा लम्हा कट जाती है ज़िन्दगी मोहब्बत, वफ़ा सिर्फ एक कहानी है जिसकी किस्मत उसे मिल जाएगी ज़िन्दगी में तो ये बस आनी जानी है हमें किसी की वफ़ा से भी क्या लेना बस अपनी ही वफ़ा जो आज़मानी है जो आज़माना चाहे हमें आजमा ले यूँ भी यहाँ छोटी सी ज़िन्दगानी है हँस कर जी लो या रोना रोते रहिये और कुछ नहीं सिर्फ एक रवानी है

अभिभूत

बस इतना भी बहुत समझा मैंने अभिभूत हुआ मैं तुम्हारे साथ से फिर नवजीवन सा पाया है मैंने क्षणिक सही तुम्हारे इस साथ से सहज से सजग नाता जोड़ा मैंने पाया तभी भरपूर तुम्हारे साथ से बस अब का ही था बस सोचा मैंने हर लम्हा जिया तुम्हारे साथ से आशा प्रत्याशा सब रख अलग मैंने जोड़ दिया यथार्थ तुम्हारे साथ से पल पल भूल हर पल जिए मैंने हर लम्हा जोड़ तुम्हारे साथ से तुम्हारे जाते जाते भी बस मैंने किया अहसास तुम्हारे साथ से

Hope

बस पत्थरों के से हो चुके इंसानों में यहाँ कहीं कोई आह सी निकलती है अब भी बुत बनकर देखने वालों में भी यहाँ शायद बाकी है उम्मीद की कोई किरण अब भी Stone like people around us, yet They demonstrate a rare deep sigh Stone turned people also it means Have still been left with a ray of hope

Thursday, August 2, 2012

आदत

आदत सी हो गई है हमें बस चुप रहने की उनको भी रास आती है आदत हमारे चुप रहने की अपने नुख्स छुपाने को आदत सी हो गई है हमें हर तरफ नुख्स ढूंढने की हमारी इसी आदत से बढ़ती रही हिम्मत उनकी रोज़ नुख्स पर नुख्स बनाये रखने की

Wednesday, August 1, 2012

ख़ुदा/ God

<सुना था हमने कभी ये बस्ती थी इंसानों की यहाँ तो सभी मानो ख़ुद को ख़ुदा समझ बैठे हैं अब कहाँ का ख़ुदा कैसी खुदाई बस चन्द लोग हैं यहाँ जो अब भी जाने क्यों दुनियां बदलने की सोचते हैं We had heard that This was the habitat of humans Alas! Everyone thing here As if they are God! Now what God what is Godlike Yet there are few people around Don't know why they think of Changing the World!

Sunday, July 29, 2012

रात भर

कल बारिश होती रही रात भर बूँदों के टपकने की आवाज़ में छुप गया कोलाहल आस पास पर मन के ख़याल आते ही रहे मुझे तनहा समझ कर रात भर घर बाहर सब तरबतर हो गए मेरे ज़ज्बात भी भीगे थे रात भर सुबह उजली धूप के नए उजाले अच्छा हुआ सब कुछ बदल गए छाये नज़ारे जो भी थे रात भर

Saturday, July 28, 2012

Colors!

रोज़ नए नए रंग ये तुम्हारे लिए नए होंगे हमने इतने रंग देख लिए अब सतरंग भी कम होंगे फिर भी देखा जाये तो ज़िन्दगी में अधिकतर श्वेत-श्याम ही ज्यादा हैं बाक़ी सब पूरक हैं इन्हीं दोनों के! New colors everyday! May be for you to count I have seen so many colors Overtaking the rainbow colors Yes when I think about it In general the life has More of white and black colors About the remaining ones They are only complimentary To these two colors!

Friday, July 27, 2012

ताज़ा/Reminiscences

आज भी ताज़ा है याद उस घर की जहाँ हम बड़े हुए जब भी हँसते खेलते किलकारियां मारते बच्चे देखता हूँ बचपन याद आ जाता है और उससे जुडी सब यादें लोग और परिवेश मन मानो कहीं इतिहास में विचरण करता फिर वापस आने पर एक ठण्डी साँस और सिहरन करने लगती है कल्पना लोक से बीते पल में जाने का असफल प्रयास Reminiscences as if yesterday! Of the home our sweet home We we were raised Whenever I come across Laughing happy children playing around with laughter I visualize my childhood And the people, environment That were associated with My mind wanders in history And when it returns to present Unsuccessfully tries to Reach-out to the dream world With a deep sigh!

Such an Ease!

कितनी आसानी से सुना डाले मेरे अल्फ़ाज़ तुमने मेरे ही सामने अपने से जतलाते हुए मैं मुस्कुरा इसलिए रहा था चलो तुम्हारे माध्यम से सही मेरे अल्फ़ाज़ काम तो आए With such an ease You narrated my own words Even in my presence As if they were your own I was smiling with a reason At least my words helped With you being the medium!

Thursday, July 26, 2012

Contradictions

मुझे मेरी दृष्टि में कोई नहीं देख सकता कई बार मैं भी नहीं इसलिए शायद मान-अपमान पसन्द नापसन्द सब कुछ मात्र मेरे मन का अंतर्द्वंद Me from my perspective No one else can view At times not even me Perhaps that's why Respect, disrespect Liking disliking Everything is merely Contradictions of my mind!

वक़्त/Time

हमें क्या मालूम वक़्त का इरादा क्या है उसे भी नहीं मालूम हमारी मंजिल क्या है हम दोनों में बस यही एक नाता है कि हम वक़्त के और वक़्त हमारे साथ चलता है I haven't got a clue What is stored in time What is my goal around Time doesn't know it too Both of us do share The only common chord I along with the time And time walks with me!

Wednesday, July 25, 2012

Peace

शांत चित्त व्यक्ति ही अनुभव कर सकता है शांति व इसके आयामों का अशांत मन द्योतक है सर्वदा शांति की कामना मात्र का Only those with peaceful mind Could at all experience Peace and it's facets Minds without peace Are manifestation of Mere aspiration for peace!

निजता /Individuality

निज में निज स्थाई नहीं किन्तु निजता का आभास नित्य है और कुछ हो न हो निजता शाश्वत सत्य है! Self in self May not be permanent, yet Feeling of self is continuous Anything else may or may not be Individuality is eternal truth!

Tuesday, July 24, 2012

फ़रियाद/request

ज़िन्दगी में ईमानदारी में कमी न हो हम तो बस यही ज़ियारत करते हैं कभी कोई फ़रियाद की न आए नौबत बस यही एक फ़रियाद हम करते हैं There should never be scarcity of honesty I just continue to consider this pilgrimage Never ever I should be making any request This alone is the request have to ever make

कल की ही बात/ yesterday

कितना स्नेह भाव था मानो कल की ही बात है वक़्त के साथ! अब सब लोग बदल गए ये कल की ही बात है Such an harmonious living As if it was yesterday only With the changed times! Most people have changed Realized this yesterday only!

Monday, July 23, 2012

Ignorance!

कौन क्या कर रहा था किसका क्या इरादा था मैं ये सब समझता था अनजान रहना ठीक था ऐसा मैं ही समझता था मैं अनजान बना रहता था I knew who was doing what Who had what intentions I had known this all about Pretending ignorance was best This was my understanding I hence maintained ignorance

Saturday, July 21, 2012

काफ़ी है

एक क़तरा ही हो सही
रौशनी काफ़ी होती है ज़िन्दगी में
मुट्ठी भर भी हो चाहे धूप सही
काफ़ी है सुनहरी रंगत के लिए
मुस्कराहट एक छोटी ही सही
काफ़ी है खुशनुमा माहौल के लिए
कभी चाँदनी धूमिल ही सही
काफ़ी है अँधेरे में चलने के लिए
अपना न सही बेगाने ही सही
काफ़ी है सफ़र में सहारे के लिए
तुम्हारा साथ लम्बा न सही
काफ़ी है फिर इन्तज़ार के लिए
हासिल हो जो सब चाहा न सही
काफ़ी है ज़िन्दगी जीने के लिए

Monday, July 16, 2012

अपनी नज़र

बियाबान में बागवान तलाशता पतझड़ का कोई आशियाना हूँ मैं नए वक़्त की पुरानी तस्वीर सा गुमशुदा कोई मुसाफ़िर सा हूँ मैं ज़माने के लिए कोई अधलिखी सी एक तल्ख़ सी एक दास्तान हूँ मैं मानो प्यासी रही नदी का कोई बुझ गया सा कोई अरमान हूँ मैं इत्तेहाद की ही गुहार सा लगाता एहतराम का एक मोहाजिर हूँ मैं अकेला ही सही फिर भी इधर अपनी नज़र का तो नूर हूँ मैं

Thursday, July 12, 2012

My random couplets/quatrets -7

लोग तो कुछ भी कह देंगे यहाँ लोगों का क्या
किसी के कह देने भर से ही क्या फर्क पड़ता है
किसी और को बतलाने की ज़रूरत ही है क्या
अपना ज़मीर तो अपनी कहानी ख़ुद कहता है
People can utter anything why to bother
No difference it should make to youself
What is the need of narrating to others
Your conscience sure speaks for itself

तुमने उस रोज़ जो वो सब कहा
अब कहते हो कि वो सब झूठ था
पर हमने तो ये अब भी नहीं कहा
कि जो जो हमने कहा वो झूठ था
What all you had uttered that day
Now you say wasn't the true feeling
But I haven't yet even mentioned
That all I said wasn't my feeling!

तनहाइयों में जब कभी भी मैं घिर जाता हूँ
खुद को अपने आप के बड़ा करीब पाता हूँ
भुला न सका जिनको जो भुला चले हमको
उनकी यादों से मन को बहला लिया करता हूँ
Whenever I got surrounded by my lonely moments
I always discoverd myself very close to my stories
Couldn't forget those who have now forgotten me
I console my sentiments through their memories

दोस्त और पुराने किरदार आस पास नदारद से पाते हैं
शायद मंज़र बदल गया है कहीं और किरदार निभाते हैं
Friends and old characters around me disappeared somewhere
Perhaps the scenario has changed and they now act elsewhere

बड़ा ऐतबार था मुझे तेरे वादे पर अब तक
अब रहा न ऐतबार तो चाहे जितने कर वादे
I have had great belief thus far in all your promises
Now the belief is gone you can make as many promises

जियारत के नाम पर तुम किसका इम्तहान लेना चाहते थे
ख़ुदा के नाम पर तुम खुदाई को ही क्यों आज़माना चाहते थे
In the name of pilgrimage who did you want to be tested
In God's name why did you want Godness itself be tested!

बदलते रंग में ज़माने की ये कैसी हवा है चली
किसको क्या कहें जब वफ़ा ही बेवफ़ा हो चली
In the changing colors of time ways of people are weird
Whom shall we say a word when trust itself is distrusted

मुझे रब ने कहा हर बात पर मेरा नाम क्यों लेता है
क्यों अपनी कमजोरियां बस यूँ ही खुद से छुपा लेता है
I was asked by God why you always take shelter in my name
Why don't you accept your weakness and follies in thy name!


कोई दुश्वारी का नहीं हमें डर है तो बेक़रारी का
होता नहीं इलाज़ नाक़ाम इश्क की बीमारी का
Not hardships but I'm afraid of restlessness
There is no treatment for failed amativeness!

इतनी ख़ता की हमने कि बस दो चार लफ़्ज़ कह दिए
मालूम न था थोड़े से अलफ़ाज़ कुछ ज्यादा कह गए
It was my only fault to utter just a few words
Didn't know so few words will speak so much!

सच है मेरी बस्ती में यहाँ बड़े दिल वाले बसते हैं
फिर भी मुझे बड़े दिल वालों की कमी खलती है
True, there are many people with hearts in my habitat
Yet I always missed the people around with large heart



सारी गर्मी सोचा था धुल जाएगी
जब बरसेगा ख़ूब जम के पानी
पानी पानी हो गए अरमान सारे
बरसात में भी नहीं बरसा पानी
The heat of summer would go
With the heavy rains I thought
With little rains in rainy season
All ambitions facing a drought

सोचा था समझोगे जब फ़र्क कभी
फ़ख्र होगा तुम्हें तब हम पर ज़रूर
जब भी आने लगता है समझ तुमको
न जाने क्यों आगे आ जाता है गुरुर
I though one day you would understand me
It will be day for you to be proud of myself
Somehow whenever you start understanding
You bring about that very arrogance of yourself

ज़िन्दगी के सब हसीन लम्हे एक एक कर सिमटते रह गए
कभी मोहब्बत के नाम पर कभी मोहब्बत के इम्तहान पर
All those precious moments of life kept shrinking
Either in the name of love or being tested for love

हमारी मंशा को समझ नहीं पाए हो तुम अब भी
सिर्फ़ गिरफ़्त में नहीं आगोश में लेना चाहते थे हम
You still haven't understood my true intentions
Not the grip but I wanted to hold you in my arms

सिर्फ़ इतना है मुझे ख़ुद पर गुरुर
कि और कोई नहीं है मुझमें गुरुर
Only this much is my arrogance on self
That no other arrogance exists in myself!


न मालूम हम किस तरह पहचानें उनको
देखा नहीं पहले कोई भी यहाँ उनकी तरह
उनका अन्दाज़ भी अलग उन्हीं की तरह
उनके ज़ज्बात भी ज़ुदा हैं उन्हीं की तरह
I don't know how try understand her
Never before I saw anyone like her
Her ways too are different like her
Emotions too are different like her

वही तमन्ना वही सोच और ज़ज्बा भी वही
फिर भी तौर तरीके कोई भी तो एक से नहीं
गुज़ारिश भी उभयपक्ष की रहेगी इसीलिए
सब एक होते भी यही सच है हम एक नहीं
Same aspirations, thinking; and enthusiasm
Yet all our ways are always so different
Expectations would to be mutual, therefore
Everything similar yet ought to be different

जिनकी उल्फ़त में भी कभी नफ़रत आती थी नज़र मुझको
अब उन्हीं की नफ़रत में भी बस उल्फ़त नज़र आती मुझको
मुझे नहीं मालूम ये कि कहाँ से चलकर कहाँ आ पहुँचा हूँ मैं
बस नज़र नज़र का फेर है इतना तो ज़रूर मालूम है मुझको

ज़िन्दगी ज़िन्दगी के ही कुछ इस तरह पास आने लगी
कि खुदबखुद अपने आप से कुछ गुफ़्तगू वो करने लगी
हरपल इधर वो कुछ अटपटा सा गीत गुनगुनाने लगी राज
दिल के खुद से छुपाकर अपने आप शरमाने लगी
Life around started coming closer to life itself
It was indulging in her conversation with itself
Always was humming few weird tunes by itself
Was blushing hiding secrets of heart from itself