Wednesday, September 3, 2014

ज़रूरी है हौसला

यहाँ और कुछ भी नहीं
समझ की बात है बस
तुम भी जी लोगे ज़रूर
चन्द परेशानियाँ ही सही
सभी जीते रहते हैं यहाँ
अपने हिस्से का जीवन
साँसें सभी की उधार की
कौन भला गिन सकता है
थोड़ी सी धूप कुछ जगह
जीने को और क्या चाहिए
ज़रूरी है हौसला बनाना
हौसला रख लो ऐसा तुम
ठोस चट्टान के बीचों-बीच
उगे हुए एक हरे पौधे सा
हर विपरीत परिस्थिति में
अलग़ से नज़र आता हुआ
कमज़ोर लेकिन हरा-भरा
सब मुसीबतों से जूझता

No comments: