Tuesday, July 23, 2013

तुम और मैं / You and Me


कोई क्षणिक मनमुटाव भी
हमारी काफ़ी बातें अलग हैं
हमें अपनी सोच अज़ीज़ है
हमारे आदर्श टकराते रहे हैं
हमारी पसंद अलग अलग है
नज़दीकियों में कमी नहीं है
अलग अलग हमारी समझ
फ़रक़ हमारे नज़रिये भी हैं
एक अंतराल बाद समझा है
दूरियों में भी नज़दीकियाँ हैं
फिर भी इतनी दूरी ज़रूरी है
समझो एक तुम और एक मैं
Differences too at times
Our ways quite different
We like our own thinking
Our ideals keep clashing
Our tastes way different
Yet being close is no issue
Different understandings
Our outlooks too different
After a while we realized
Distance too is closeness
Yet this distance essential
Know you are one I’m one!


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