Wednesday, April 1, 2015

मन की बाज़ी

ज़िन्दगी की ही रफ़्तार से 
ज़िन्दगी संग बढ़ते चलो

मुख्तलिफ रंग मिलेंगे यहाँ
इनको इनकी नज़र से देखना
चाबी ख़ुशियों की रख सँग सदा
खोल ताले सारे बढ़ते चलो
कुछ अपने भरोसे कुछ समय के
कामयाबी के पथ पर चलो
मंज़िलें मिलती जाएँगी यहाँ
सुर्खरू यूँ ही होते चलो
जीत कर हार को सबक से
जीत में हार की समझ से
अपने मन की सदा जीत हो
मन की बाज़ी यूँ जीते चलो
ज़िन्दगी के भी सुर ताल हैं
इसकी हर शै अपनी ही है
ज़िन्दगी की ही रफ़्तार से
ज़िन्दगी संग बढ़ते चलो

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