Sunday, September 16, 2012

अकथनीय/Unmentionable

ख़ामोशी में बसे हैं मेरे
कुछ अकथनीय सत्य
मानो मैं झुठलाता सा वो
समस्त कथ्य और श्रव्य
स्वतः अवलोकित तथ्य
कई बात तो कह से डाले
पूर्ण नहीं पर अर्धसत्य
जो थे मेरी ही दृष्टि में
तर्क किंचित अकाट्य
और संभवतः ध्रुव सत्य
In my lurking silence are
Few unmentionable truths
As if I had disbelieved
The spoken and the heard
Facts observed by myself
At times I had revealed
Though the partial truths
Those in my own judgement
Reason indisputable though
And perhaps speaking truths!


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