Thursday, December 8, 2011

स्वागत

स्वागत है ऐ बिटिया तुम्हारे आने का मेरे द्वार
तुम नव ऋतु की नव कली सदृश बन आई हो
मेरी प्यासी पथराई सी आँखों में नव ज्योति सी
सूखे से तरुवर में तुम ऐसी हरियाली लाई हो
मेरे उद्गार नए शब्द बन पड़े उमड़ अब कितने
तुम तन मन में कैसा नव जीवन मेरे लाई हो
हर पल हर ध्वनि तेरी कितनी है प्रिय मुझको
मैं संभालूँगा ये सब जो उल्लास हर्ष ले आई हो

1 comment:

त्रिलोक चन्द्र जोशी 'विषधर' said...

duniya ke liye tum shayad ek pida ho
lekin meri jindagi ki amulya dhal ho tum;
sukh ka ehsas ho tum beti
meri sans ho tum
tumko meri gini sans bhi mel jaye beti;
Mere aangan ki ch hakti chidiya
mera sangeet ho tum bitiya;