Saturday, April 12, 2014

पंछियों के पँख में

पंछियों के पँख में बैठ के आई
निंदिया आई निंदिया आई
मेरे बिट्टू की निंदिया आई
निंदिया आई निंदिया आई

बादलों के झूले में बैठ के आई
झूला झुला के फिर पास आई
निंदिया आई निंदिया आई

सुबह से शाम के सफर में थक के आई
किधर से आई इधर को आई
निंदिया आई निंदिया आई

पंछियों के साथ साथ उड़ के आई
जाने कौन कौन देश घूम के आई
निंदिया आई निंदिया आई

बिट्टू मेरा सोने लगा सपनों की दुनियाँ में खोने लगा
सुबह से शाम के सफर में थक के आई
निंदिया आई निंदिया आई


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