Wednesday, April 17, 2013

मायूस

इन दिनों बहुत मायूस हूँ मैं
आदत जो पड़ गई थी मुझे
तुम्हारी उन आलोचनाओं की
हर बात में हर चीज में मेरी
शायद बिना सोचे समझे भी
अब सब सूना लगता है मुझे
जब से देख रहा हूँ मैं इधर
नुख्स निकालना छोड़ दिया
तुमने मुझ में मेरी बातों में
बस तुम ही जानो किसलिए
तुम्हारा नजरिया बदल गया
मेरे लिए या फिर मेरी ओर
ये भी नहीं मान सकता हूँ मैं

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